दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में सबसे ज्यादा भारत के 46 शहर, गाजियाबाद में सबसे जहरीली हवा

हर साल दिवाली के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक हो जाता है और लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है। भारत के साथ-साथ पड़ोसी देश भी वायु प्रदूषण चुनौती से जूझ रहे हैं। भारत, चीन और पाकिस्‍तान एक बार फिर से भारी प्रदूषण से जूझ रहे हैं। हर साल की तरह से इस साल भी भारत की राजधानी नई दिल्‍ली धुएं की मोटी परत से ढंक गई है। पिछले सप्‍ताह हालत इतनी खराब हो गई कि दिल्‍ली में स्‍कूलों को बंद करना पड़ा। दुनियाभर में हवा की गुणवत्‍ता पर नजर रखने वाले IQAir की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 100 सबसे ज्‍यादा प्रदूषित सूची में चीन और पाकिस्‍तान को पछाड़कर टॉप पर पहुंच गया है। भारत के गाजियाबाद शहर की हवा देश में सबसे ज्‍यादा जहरीली है और वह चीन के होटान शहर के बाद दुनिया में दूसरा सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहर है।

अलजजीरा ने IQAir के हवाले से बताया कि राजधानी नई दिल्‍ली में हवा में PM2.5 पार्टिकल का स्‍तर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के स्‍वीकार्य स्‍तर से 34 गुना ज्‍यादा है। इसमें कहा गया है कि ठंड में हवा सबसे ज्‍यादा जहरीली हो जाती है जब किसान पराली जलाते हैं। PM2.5 पार्टिकल इंसान के फेफड़ों को तबाह करके रख देते हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 में दुनिया के 100 सबसे ज्‍यादा प्रदूषित शहरों में 46 भारत के थे।

हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाले IQAir के अनुसार, 2020 में 100 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से भारत के 46, चीन के 42, पाकिस्तान के छह, बांग्लादेश के चार, इंडोनेशिया और थाईलैंड के एक-एक शहर शामिल थे। इन सभी शहरों में हवा की PM2.5 गुणवत्ता रेटिंग 50 के पार थी। इसका मतलब यहां की हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सबसे प्रदूषित 10 शहरों में से नौ भारत के हैं।

चीन का होटान सबसे अधिक प्रदूषित शहर
2020 में चीन का होटान सबसे प्रदूषित शहर रहा। सूची में दूसरे स्थान पर गाजियाबाद, तीसरे पर बुलंदशहर, चौथे पर बिसरख जलालपुर, पांचवें पर भिवाड़ी, छठे पर नोएडा, सातवें पर ग्रेटर नोएडा, आठवें पर कानपुर, नौेंवें पर लखनऊ और 10वें स्थान पर दिल्ली है।

मेडिकल जर्नल लान्सेट के मुताबिक, 2019 में वायु प्रदूषण के कारण भारत में 16 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन की जगह रसोई गैस का इस्तेमाल बढ़ने से 1990 के बाद घरों में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतें कम हुई हैं, लेकिन वातावरण में फैले प्रदूषण तत्व अधिक घातक साबित हो रहे हैं। यहां वाहनों और उद्योगों से निकलने और पराली जलाने से होने वाला धुआं प्रदूषण की मुख्य वजहों में शामिल है।

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