Wednesday, August 4, 2021

 

 

 

जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए जज के समर्थन में सड़कों पर उतर आया था पूरा देश

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Kohram News – Date 10 January 2018

आज जिस तरह हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस करके न्याय प्रणाली में चल रही अनियमितता को लेकर सवाल उठाया है उससे ना सिर्फ प्रशासन में खलबली मची है बल्कि देश का आम नागरिक भी एक तरह से गंभीर हुआ है. न्याय प्रणाली को सवालिया घेरे में रखने वाले जजों में जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ़ शामिल हैं.

वैसा भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है की खुद सुप्रीम कोर्ट के जजों को सामने आना पड़ा लेकिन विश्व के इतिहास में ऐसा काफी बार हो चूका है. अमेरिका के प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन को मोनिका लेवेंस्की के साथ सम्बन्ध रखने के मामले में वहां की सर्वोच्च न्यायलय महाभियोग चला चुकी तथा हमारे पड़ोस में पाकिस्तान में भी उस समय ऐसा ही कुछ मामला देखने को मिला था जब जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने सेना का डंडा इस्तेमाल करते हुए तख्ता पलट किया था और उस समय (2007) के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस इफ्तेखार चौधरी ने मुशर्रफ सरकार के खिलाफ ना सिर्फ बिगुल फूंका था बल्कि भ्रष्टाचार तथा कमज़ोर प्रशासन को लेकर कई दफा आलोचना की थी.

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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के 20वे मुख्य न्यायाधीश इफ्तेखार चौधरी द्वारा लगातार की जा रही मुशर्रफ सरकार की आलोचना से अजिज आकर जनरल परवेज मुशर्रफ ने उनसे मांग कर डाली थी लेकिन देश के सर्वोच्च नेता के आदेश को धता बताते हुए चीफ जस्टिस इफ़्तेख़ार चौधरी ने इस्तीफा देने से मना कर दिया तथा इसके उलट मुशर्रफ सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा दी.

देश के दो सबसे अहम् व्यक्तियों के बीच चल रही जंग में सबसे अहम् रोल रहा पाकिस्तानी अवाम का जिसने सच्चाई तथा ईमानदारी का साथ देते हुए चीफ जस्टिस के समर्थन में सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया. पाकिस्तान की आवाम इफ्तिखार चौधरी के ईमानदारी की मुरीद थी। लोगों में इस बात का गुस्सा था कि सरकार चौधरी पर गलत व्यवहार और पद के दुरुपयोग का आरोप लगा कर इस्तीफा मांग रही है। सरकार के खिलाफ लोगों ने आंदोलन छेड़ दिया। उस वक्त पाकिस्तानी मीडिया ने इसे लोकतंत्र बचाने की मुहिम नाम दिया था।

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मामला बिगड़ते देख गुस्से में आई परवेज मुशर्रफ सरकार ने उन्हें पद से सस्पेंड कर दिया लेकिन सरकार के अंदेशे के विपरीत स्थिति और खराब हो गयी. देश के मुख्य न्यायधीश निलंबन से लाहौर बार एसोसिएशन और वकील भी उनके समर्थन में आ गए तथा पाकिस्तान में वकीलों और पुलिस के आमने सामने की स्थिति पैदा हो गयी. कई जगह पुलिस-वकीलों में झडपें हुई और पूरे पाकिस्तान में अदालतों का बहिष्कार शुरू हो गया जिसके बाद दवाब में आई सरकार को चीफ जस्टिस का निलंबन वापस लेना पड़ा. आज भारत में भी वैसी ही स्थिति है लेकिन देखना यह होगा की जनता किसके समर्थन में जाती है.

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