जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं वैसे वैसे उन बेफजूल की बातों को मुद्दा बनाया जा रहा है जो समाज में अभी तक सामान्य हुआ करती थी. कट्टरपंथ के इस दौर में हम ऐसे स्थान पर पहुँच गये हैं जहाँ कुछ दिनों बाद हमे ऐसी ख़बरें भी पढने में आयेंगी की “यह है भारत की शान, जहाँ हिन्दू मुसलमान एक साथ बस में करते हैं सफ़र”. 

सर्वविदित है की रजनीतिक पार्टियाँ अपनी रोटियां सेकनें के लिए सांप्रदायिक मुद्दा जीवित रखना चाहते हैं और मेन सत्रात मीडिया की तो बात करना ही बेकार है. वो इतनी करप्ट हो चुकी है की विश्वसनीयता खो चुकी है.

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आइये बताते है की सर्फ एक्सेल के विज्ञापन में ऐसा क्या है जो इतना हंगामा मचा हुआ है.

 

भारतीय टेलीविज़न उद्ग्योग को सबसे ज्यादा विज्ञापन उपलब्ध कराने वाली कंपनी हिंदुस्तान यूनीलीवर के एक ब्रांड ‘सर्फ एक्सेल’ ने 27 फरवरी की रात्री को एक विडियो विज्ञापन रिलीज़ किया जिसमे एक बच्ची साइकिल से आती है और छत पर खड़े बच्चों से अपने उपर रंग होली का रंग फेकने को कहती है. जब बच्चे उस बच्ची पर रंग डालते है तो वो और ज्यादा रंग डालने के लिए उकसाती है जिससे की बच्चों का सारा रंग खत्म हो जाता है. फिर वो ईशारे से एक बच्चे को बुलाती है जो सफ़ेद कुरता और सिर पर टोपी लगाये (मुस्लिम बच्चा) निकलकर सामने आता है. बच्ची साइकिल पर लड़के को बैठाकर मस्जिद छोड़कर आती है और कहती है नमाज़ पढ़कर आ रंग ज़रूर डालेगा.

तो यह था विडियो में जिसका विरोध किया जा रहा है हालाँकि अधिकतर विरोध करने वालो की प्रोफाइल चेक करने से यह साफ़ हो जाता है की वो किस पार्टी और विचारधारा से प्रभावित हैं.

दरअसल विरोध के पीछे की जो वजह निकलकर सामने आती है उसके काफी कारण हैं, एक तो इस विडियो को लव जिहाद से जोड़ा जा रहा है तथा हिन्दू बच्चो को रंग डालने के कारण कहा जा रहा है की इसमें हिन्दू बच्चे की छवि  उपद्रवी के तौर पर दिखाई गयी है.

यहाँ कुछ सवाल हैं जो सामान्यत: पूछे जाने चाहिए 

  1.  क्या 8-9 वर्ष के बच्चों को पता होगा की लव जिहाद क्या होता है ?
  2.  विरोध करने जब खुद इतनी उम्र के थे तो क्या उन्हें इस बात का ज्ञान था की किसके साथ खेलना है और किसके साथ नहीं.
  3. होली का त्यौहार धार्मिक त्यौहार है उसे उपद्रवी के तौर पर क्यों देखा जा रहा है, क्या होली के लेकर आजतक कोई विडियो या फिल्म का कोई गाना नहीं बना.
  4. क्या यह विडियो होली त्यौहार की मजाक बनाता है ?(जो की नहीं ) या फिर भोजपुरी गानों में जो होली के नाम पर अश्लीलता परोसी जाती है वो त्यौहार का मजाक बनाते हैं
  5. भारत संस्कृति हमेशा से दुसरे के धर्म की इज्ज़त करना सीखाती आई है यही कारण है की हम हजारों वर्षों में विभिन्न समुदाय, भाषा और रंग के होने के कारण भी एक देश हैं.
  6. दुसरे धर्म का आदर करना से क्या मतलब है ? उसे अपने धर्म को मानने की पूरी छूट हो, या फिर उसे अपनी धार्मिक क्रिया कलापों में अड़चन पैदा हो?
  7. अगर आप किसी धर्म की इज्ज़त करते हैं तो क्या उसे अपने धर्म के कार्यकलापों को करने देंगे या उसे रोकने को आदर करना समझेंगे?

लेकिन जिस तरह का विरोध सोशल मीडिया पर देखने में आ रहा है उसे देखकर यह नही लगता की कोई भी लॉजिकल बात इस समस्या का समाधान हो सकती है. वैसे मज़े की बात यह है की टीवी पर हम जितने भी विज्ञापन देखते है उनमे से अधिकतर हिन्दुस्तान यूनिलेवर के ही ब्रांड हैं मसलन के तौर पर लक्स, लिप्टन, लाइफबॉय, ब्रीज, व्हील, वेसिलीन, आदि

यूनिलेवर के ब्रांड्स की लिस्ट देखने के बाद आपको अंदाज़ा आ गया होगा की यह सिर्फ एक प्रोडक्ट मुहैय्या कराने वाली कंपनी नहीं है बल्कि वो कंपनी है. इस बात को हम यूं भी समझ सकते हैं की टीवी के सभी चैनल TRP के दौड़ में लगे रहते हैं, अगर कोई टीवी सिरियल अच्छी रेटिंग नहीं देता तो उसे तुरंत बंद कर दिया जाता है, रेटिंग इस बात पर भी निर्भर करती है की उस टीवी धारावाहिक में विज्ञापनदाता कितना इंटरेस्ट ले रहे हैं. वैसे तो विज्ञापन मिलने और trp का सीधा सम्बन्ध होता है. जिसकी TRP अधिक होगी उसे अधिक विज्ञापन मिलेंगे, तो जिस TRP की जंग के लिए सभी चैनल आपस में गलाकाट प्रतियोगिता कर रहे हैं हिन्दुस्तान यूनिलेवर TRP आधारित सबसे अधिक विज्ञापन देने वाली कंपनी है.

हालाँकि विज्ञापन का विरोध करने वालो के पास कोई भी उचित कारण नहीं है लेकिन एक बात कॉमन है अधिकतर विरोधी सर्फ एक्सेल के बदले पतंजलि का प्रोडक्ट इस्तेमाल करने का सुझाव दे रहा हैं.

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