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केरल के मलप्पुरम में शुक्रवार 26 जनवरी को अपने गिने-चुने समर्थकों को लेकर जुमे की नमाज़ में इमामत करने वाली जमीदा को खुद नमाज पढ़ानी नहीं आती है.

34 साल की जमीदा ने दावा किया कि भारत के इतिहास में पहली बार एक महिला के रूप में उन्होंने जुम्मे की नमाज में  इमामत की है. लेकिन वास्तव में सच ये है कि उन्होंने नमाज में इमामत नहीं बल्कि ढोंग किया है. जिसकी पुष्टि खुद उनके नमाज के वीडियो से होती है.

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दरअसल, इस महिला की इमामत का ढोंग का पर्दाफाश उस वक्त होता है. जब वह नमाज के दौरान रुकु से उठती है. दरअसल नमाज में रुकुह से उठते समय سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ यानि समीहाल्लाहुलिमन हमीदा और رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ रब्बना वलक्लहम्दु कहा जाता है जबकि ये ढोंगी मोहतरमा الله أكبر यानि अल्ल्लाहू अकबर कह रही है.

दुसरी ध्यान देने वाली बात ये है कि जुमे की नमाज में इमाम किरात बुलंद आवाज में करता है. जबकि यहाँ पर ऐसा नहीं है. इसके अवाला दुनिया में कोई नमाज ऐसी नहीं जो एक सजदे में अदा होती है. जबकि यहाँ एक सजदे वाली नमाज अदा की गई. जिससे ये साबित होता है कि मुस्लिमों को बदनाम करने के लिए ढोंग तो रचा गया लेकिन उसमे भी अक्ल का इस्तेमाल नहीं किया गया.

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