अनुराग कश्यप के निर्देशन में बानी फिल्म उड़ता पंजाब को सेंसर बोर्ड ने हरी झंडी तो दे दी हैं. लेकिन फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप की मुश्किलें हल होती नज़र नहीं आ रही हैं. उनकी अगली फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर-3 इसी साल अक्टूबर में रिलीज़ हो सकती हैं, जिसके विरोध की पटकथा अभी से लिखी जा रही है.

बताया जा रहा है की गैंग्स ऑफ वासेपुर-1 और गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 में झारखण्ड के धनबाद जिले की जो कहानी फ़िल्मी परदे पर दिखाई गयी उससे यहाँ की छवि ख़राब हुई. जिसके कारण जिले की बहुत बदनामी भी हुई.

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इसके साथ-साथ वार्ड काउंसलर निसार आलम का कहना है कि 2012 में इस फिल्म के पहले पार्ट के आने के बाद वासेपुर में जुर्म का गिराफ भी बढ़ गया. जिसके चलते झारखंड के धनबाद ज़िले के वासेपुर क़स्बे के लोगों ने इसके विरोध का फ़ैसला किया है.कस्बे में रहने वाले लोगो ने बताया कि अब लोग वासेपुर में अपनी बेटियों की शादी करने से कतरा रहे हैं.

फिल्म के लेखक, ज़ीशान क़ादरी को गलत ठहराते हुए काउंसलर निसार आलम ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है की ज़ीशान अपने स्वार्थ के कारण वासेपुर की गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि “इस क़स्बे के लोग आईएएस, आईआईटी इंजीनियर, डॉक्टर और पुलिस में बड़े अधिकारी हैं. फिल्म तो इन ख़ूबियों पर भी बनाई जा सकती है.” लेकिन उन्होंने इन बातों को नज़रअंदाज़ कर कहानी लिख डाली.

कस्बे के निवासी ने बताया कि कोल्कता में उन्हें सिर्फ इस बात पर होटल में कमरा नहीं दिया गया क्योकि वह वासेपुर के हैं. ऐसा ही अनुभव दुसरे निवासियों का भी हैं.

भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के धनबाद जिलाध्यक्ष बबलू फ़रीद का मन्ना हैं कि इस फिल्म के कारण वासेपुर के युवाओं पर ग़लत असर पड़ रहा है और इसलिए फिल्म के पार्ट-3 का विरोध होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए क़ानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी.जबकि पिछले दिनों वासेपुर के क्राइम ग्राफ का मुआयना करने आये लेखक ज़ीशान कादरी ने बतया के पार्ट-1 और पार्ट-2 में हमने 2002 तक कि कहानी को परदे पर उतरा था इस पार्ट में हम 2003 से 2015 तक की कहानी को बयां करेंगे.

Web-Title: Protest against Anurag’s film Gangs of Wasseypur-3

Key-Words: Gangs of Wasseypur, anurag kashyap, film, release, dhanbaad, jharkand, censor board

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