jafir

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भारत में बंटवारे के 70 साल बाद भी मुस्लिमों को आए दिन अपने देशप्रेमी होने का सबूत देना पड़ता है. रास्ते चलते हर किसी के द्वारा मुसलमानों के रिश्तें पाकिस्तान के साथ जोड़ना एक चलन बन गया है. ऐसे में एक मुस्लिम युवक ने कविता के जरिए अपने इस दर्द को दुनिया के सामने पेश किया.

सैय्यद जफीर नाम के इस शख्स ने ‘वो मुझे कहते हैं पाकिस्तानी’ नाम के शीर्षक कविता लिखी. उन्होंने कविता के जरिए कहा कि ‘इस मुल्क की सड़कों पर निकलो कभी, तुम्हें देखेंगे कई शर्मा, सिंह और जैन. और उन्हीं के बीच में होंगे कुछ खान अकबर, अहमद, जमानी, जिनको ना जाने क्यों ये दुनिया कह देती है पाकिस्तानी.

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उन्होंने आगे के अंतरे में कहा, अक्सर सोचा करता हूं कि आखिर कह भी दिया तो क्या है वो भी अच्छे भले हैं इंसान. लेकिन जब दिल के तहखानों में झांकता हूं तो मुझे दिखता है सिर्फ हिंदुस्तान.’

जफीर आगे कहते हैं, ‘इसी सरजमी का हूं परिंदा, इस पर हूं सही, सालिम और जिंदा लेकिन बस पढ़ लेता हूं नमाज और ईद पर मेरे घर में बन जाती हैं सेवईयां और बिरयानी तो वो कह देते हैं मुझे पाकिस्तानी.’

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