Monday, May 17, 2021

मालदा हिंसा: आग में सियासी रोटियां सेंकने की होड़

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नई दिल्ली,मालदा में भड़की हिंसा और तनाव के बाद राजनीति चरम पर है। बीजेपी का कहना है कि ममता सरकार की नरमी की वजह से ये तोड़फोड़ और हिंसा हुई। ये पूरा हंगामा सुनियोजित था और मालदा में सांप्रदायिक परचे बांटे गए थे।

वहीं, पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि मालदा हिंसा पर भाजपा राजनीति कर रही है। आखिर हिंसा के पीछे क्या कारण हैं। पेश हैं कई सवालों का जवाब देती रिपोर्ट।

1. मालदा में किस घटनाक्रम के दौरान हिंसा भड़की ?
अखिल भारत हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी के विरोध में अल्पसंख्यक संगठनों द्वारा मालदा में रैली निकाली जा रही थी। तभी भीड़ अचानक हिंसक हो गई और पुलिस के कई वाहन जला दिए गए, कालियाचक थाने में तोड़-फोड़ की गई।

बीएसएफ की एक बस रैली को पार करने का प्रयास कर रही थी। उसी समय उसके ड्राइवर की कुछ लोगों के साथ कहासुनी हो गई। उसके बाद रैली में शामिल लोगों ने एक सरकारी बस के तमाम यात्रियों को नीचे उतार कर बस में आग लगा दी। भीड़ की नाराजगी बढ़ती रही।

2. बंगाल सरकार की पूरे में क्या भूमिका रही ?
सरकार ने शुरूआत में पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखी। स्थानीय पुलिस ने घटना के दो दिन बाद इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया। लेकिन मुख्य आरोपियों को पकड़ा नहीं जा सका। शुरूआती में घटना को मामूली झगड़ा बता कर दबाने का भी प्रय़ास हुआ। तीन दिन बाद घटना उजागर हुई। पुलिस व प्रशासन की भूमिका बेहद लापरवाह रही।

पार्टी के सांसद गुलाम रसूल बलवई के मौके पर मौजूद रह कर भीड़ को हिंसा व आगजनी के लिए उकसाने के आरोप हैं। हालांकि उन्होंने इसका खंडन किया और कहा कि वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे। यह आरोप मालदा मामले को विवादास्पद बनाने और मूल मकसद छिपाने के लिए हो सकता है।

दरअसल, पूरा इलाका जाली नोटों की तस्करी और गांजे की खेती के लिए कुख्यात है। वहां पूरी आबादी अल्पसंख्यकों की है। अत: यह दो गुटों की आपसी रंजिश भी हो सकती है।

4. इस हिंसा का बंगाल में होने वाले चुनावों से क्या संबंध है ?
बंगाल के चुनावों में अल्पसंख्यकों की 27 फीसदी आबादी खासकर मालदा जैसे सीमावर्ती जिलों में कई सीटों पर निर्णायक भूमिका है। इसलिए तमाम दल उनको लुभाने और उनका हमदर्द बनने की कवायद में हैं। राज्य सरकार व तृणमूल कांग्रेस की चुप्पी का राज भी यही है और विपक्षी दलों की सक्रियता का भी।

सरकार को डर था कि विपक्षी दल इस मामले का राजनीतिक लाभ उटाने का प्रयास कर सकते हैं और इसे सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई।

6.बंगाल सरकार ने हिंसा के बाद क्या कदम उठाए ?
सरकार ने कोई खास कदम ही नहीं उठाया है। मुख्यमंत्री ने घटना के चार दिनों बाद इसे बीएसएफ और स्थानीय लोगों के बीच मामूली झड़गा बताया है। लेकिन वे इस सवाल का जवाब नहीं दे सकी हैं कि अगर झगड़ा बीएसएफ से था तो लोगों ने पुलिस थाना क्यों फूंका, बीएसएफ चौकी पर हमले क्यों नहीं किए?

यह बात भी सामने आ रही है कि कालियाचक थाने में जाली नोटों और गांजे की खेती व तस्करी वाले गिरोहों से संबंधित सबूत जलाने के लिए ही वहां आगजनी की गई थी।

साभार अमर उजाला

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