Friday, September 17, 2021

 

 

 

तीन तलाक़ असंवैधानिक, पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नही – हाईकोर्ट

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ranchi

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को तीन तलाक पर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ क्रूरता बताया.

दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर नहीं है. यहां तक कि पवित्र कुरान में भी तलाक को सही नहीं माना गया है.

अदालत ने कहा कि तीन तलाक की इस्लामिक कानून गलत व्याख्या कर रहा है. तीन तलाक महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है.

फैसला शरीयत के खिलाफ

दूसरी तरफ, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को शरियत के खिलाफ बताया है. बोर्ड के अनुसार इस फैसले को वह कोर्ट में चुनौती देंगे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला शरियत के खिलाफ है. इस फैसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऊपरी अदालत में चुनौती देगा. — रशीद फिरंगी महली (इस्लामिक विद्वान)

हाईकोर्ट ने बुलंदशहर की हिना और उमरबी की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बात कही. 24 वर्षीय हिना की शादी 53 साल के एक शख्स से हुई थी, जिसने उसे बाद में तलाक दे दिया.

फोन पर ही दिया तलाक

वहीं, उमरबी का पति दुबई में रहता है, जिसने उसे फोन पर तलाक दे दिया था. इसके बाद उसने अपने प्रेमिका के साथ शादी कर ली थी. जब उमरबी का पति दुबई से लौटा तो उसने हाईकोर्ट में कहा कि उसने तलाक दिया ही नहीं. उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी से शादी करने के लिए झूठ बोला है. इस पर कोर्ट ने उसे एसएसपी के पास जाने को कहा.

प्रदेश18 से खास बातचीत में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक विद्वान खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस फैसले को शरियत कानून के खिलाफ बताया.

उन्होंने कहा, ‘हमारे मुल्क के संविधान ने हमें अपने पर्सनल लॉ पर अमल करने की पूरी-पूरी आजादी दी है. इस वजह से हमलोग इस फैसले से मुत्तफिक नहीं है. पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल कमेटी इस फैसले को स्टडी करके इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में अपील करेगी.’

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