Wednesday, January 19, 2022

हॉकी के जादूगर मोहम्मद शाहिद को अंतिम विदाई

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भारत की प्राचीन मोक्ष नगरी वाराणसी को बिसमिल्लाह खां, पंडित रविशंकर, गिरिजा देवी, किशन महाराज और सितारा देवी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. भारतीय शास्त्रीय संगीत में बनारस के संगीत घराने के योगदान को दुनिया सिर आंखों पर रखती है, लेकिन खेल की दुनिया भी अपने बनारसी योगदान के लिए जानी जाएगी, मोहम्मद शाहिद के नाम से जिसे हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के बाद का सबसे बड़ा खिलाड़ी होने का गौरव प्राप्त है.

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रिबलर और रिवर्स फ्लिक के बादशाह, फॉरवर्ड मोहम्मद शाहिद उसी बनारस में 14 अप्रैल 1960 को पैदा हुए जिससे महज डेढ़ सौ किलोमीटर दूर इलाहाबाद की मिट्टी ने 1905 में हॉकी के पहले जादूगर ध्यानचंद को पैदा किया था.

 

मोहम्मद शाहिद के शानदार हॉकी खिलाड़ी के रूप में भारत सरकार ने उन्हें 1986 में पद्मश्री से नवाजा. भारतीय हॉकी का यह दूसरा जादूगर भी उत्तर प्रदेश की माटी का लाल था, वाराणसी के खजुही मोहल्ले से भारतीय हॉकी के इस दूसरे जादूगर का गुरुवार को जब जनाजा उठा तो सबकी आंखें नम थीं. पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै और आरपी सिंह सहित हॉकी के सैकड़ों प्रेमी जनाजे में शामिल हुए. शाहिद को टकटकपुर के उनके पुश्तैनी कब्रिस्तान में दफन किया गया.

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