नयी दिल्ली – न्यूज़ीलैण्ड के क्राईस्टचर्च में दो मस्जिदों पर हुए आतंकी हमले से पूरी दुनिया सदमे में आ गयी थी, हालाँकि पहले भी आतंकवादी हमले होते रहें हैं लेकिन यह पहला ऐसा आतंकवादी हमला था जिसमे आतंकी ने हमले का लाइव प्रसारण किया था.

यहाँ न्यूज़ीलैण्ड की प्रधानमत्री ने मुस्लिम समुदाय को अपना समर्थन दिखाने के लिए हिजाब पहना तथा इस्लामिक प्रेयर में भी शामिल हुई तथा हमले के बाद वहां की स्थनीय नागरिकों ने जिस तरह एकता का परिचय दिया तथा अल्पसंख्यक समुदाय पर अपना भरोसा बरकरार रखने के लिए हरदम उनके साथ खड़े रहे, यह बात काबिलेतारीफ कही गयी थी.

आज क्राइस्टचर्च हमले के आरोपी को सजा सुनाई गयी जिसके लेकर बीबीसी हिंदी ने भी समाचार प्रकाशित किया, इस समाचार में यह बताया गया की जज ने क्या क्या सजा सुनाई और पीड़ितों के क्या बयान थे, तथा हमले के बाद उनकी ज़िन्दगी किस तरह बदल गयी.

इस खबर में सबसे गौर करने वाली बात यह है की बीबीसी हिंदी हर जगह ब्रेंटन टैरेंट, जिसे न्यूज़ीलैण्ड ने आतंकवादी घोषित किया है तथा उसका दुर्दांत हमला दुनियाभर ने देखा, उसके साथ बीबीसी हिंदी बहुत सम्मान से बात कर रहा है, खबर के आखिरी पैराग्राफ को पढने के बाद यह समझना मुश्किल है की बीबीसी हिंदी किसी आतंकवादी को लेकर लिख रहा है या किसी सम्मानीय व्यक्ति को लेकर.

खबर में हर जगह आतंकी ब्रेंटन टैरेंट को सम्मानित शब्दों (उनका,उन्हें, रहने वाले ) जैसो शब्दों से मुखातिब किया जा रहा है, क्या बीबीसी हिंदी की नज़र में आतंकी जिसने सबके सामने नमाज़ पढ़ रहे लोगो पर अन्धाधुन फायरिंग करके 51 लोगो को मौत के घात उतार दिया, वो सम्मानित व्यक्ति है ? क्या बीबीसी हिंदी किसी आतंकी को आदर्श मानता है ?

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