VHP to build the temple two trucks loaded with stones reached Ayodhya

रघुवरशरण, अयोध्या। राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला में गत पखवारे एक ट्रक पत्थर आने पर भले ही आसमान सिर पर उठा लिया गया हो पर यह कोई नई घटना नहीं थी। सितंबर 1990 से संचालित न्यास कार्यशाला के 25 वर्षों से अधिक के सफर में मंदिर निर्माण के लिए कुल एक हजार ट्रक पत्थर राजस्थान की खदानों से आ चुके हैं। इनमें आधे से अधिक पत्थरों की तराशी भी की जा चुकी है।

इस मुहिम में न्यास के करीब 30 से 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शुरू में प्रति ट्रक पत्थरों की कीमत एक लाख रुपये पड़ती थी और अब यह बढ़कर एक लाख 80 हजार रुपये हो गई है। इस हिसाब से आकलन करें तो न्यास का 12 से 15 करोड़ रुपये पत्थरों की कीमत अदा करने में खर्च हुए हैं। पत्थरों की तराशी भी कम खर्चीली नहीं रही है।

बारीक काम करने वाले विशेषज्ञ शिल्पी प्रतिदिन आठ सौ से एक हजार तक पारिश्रमिक लेते हैं। शुरुआती एक दशक तक कार्यशाला में 50 से 80 तक शिल्पी काम करते रहे। इस अवधि में न्यास को पारिश्रमिक के रूप में भी 12-15 करोड़ रुपये व्यय करने पड़े। तो बाद के डेढ़ दशक की अवधि में यदि चार वर्ष तक कार्यशाला की गतिविधियां ठप रहीं तो बाकी के वर्षों में दो से लेकर 10 शिल्पी तक कार्यरत रहे। इनके पारिश्रमिक के रूप में न्यास को औसतन पांच करोड़ रुपये व्यय करने पड़े।

कार्यशाला की बिजली, जलापूर्ति एवं शिल्पियों का आवास तथा देख-रेख में लगे आधा दर्जन अन्य कर्मचारियों के मद में भी प्रतिदिन तीन से चार हजार रुपये व्यय होने की खबर है। इस मद में अब तक तीन करोड़ रुपये और व्यय का अनुमान है। हालांकि इस बावत विश्र्व हिंदू परिषद (विहिप) एवं न्यास के जिम्मेदार लोग मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार समय आने पर पूर्ण हिसाब-किताब के साथ ही न्यास कार्यशाला का व्यय सार्वजनिक करना संभव है। साभार: jagran.com


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