amu-scientist-made-earthquake-oscillator-equipment

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एएमयू या अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एेसा उपकरण तैयार किया है जिससे समय रहते भूकंप के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसके आधार पर आगाह किया जा सकता है कि भूकंप आने वाला है। इससे लोगों को सचेत करके जन हानि को रोका जा सकता है। लो फ्रीक्वेंसी कंपन सिद्धांत पर काम करते हुए एएमयू के इलेक्ट्रिकल विभाग के वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एमएस जमील असग़र और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सैयद जावेद आरिफ़ ने उपकरण तैयार किया है। इस उपकरण का दोनों वैज्ञानिक पेटेंट करा चुके हैं।

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प्रो. एमएस जमील असग़र ने बताया कि इस उपकरण में इलेक्ट्रॉनिक ऑसीलेटर लगा है, जो हाई फ्रीक्वेंसी सिगनल छोड़ता है, जिससे रोटेटिंग मैगनेटिक फील्ड उत्सर्जित होती है जो उपकरण में लगे वाइब्रेशन सेंसर युक्त सिंक्रो में जाती है। जो कंपन को रीड करके उसकी रिकॉर्डिंग, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को भेजता है। इसमें लगा वाइब्रेशन सेंसर जनवरों की तरह न्यूनतम फ्रीक्वेंसी को रीड करने में सक्षम है। जमील असग़र ने कहा कि इसे बिजली या बैटरी से उपकरण को चलाया जा सकता है। इसे ज़मीन पर रखकर मापा जाता है।

प्रो. असग़र ने बताया कि भूकंप कभी सीधे नहीं आता। उन्होंने कहा कि धरती के नीचे की प्लेट्स खिसकने से जमीन से तरंगें उठने पर कंपन होता है। जो इस बात की निशानी होती है कि धरती के नीचे कुछ हलचल चल रही है। लगातार कंपन और उसकी फ्रीक्वेंसी माप कर यह जाना जा सकता है कि भूकंप एक सप्ताह में आ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रयास किया जाएगा कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों और कुछ विश्वविद्यालयों में ये उपकरण रखवा कर कई इलाकों की जमीनी हलचल को इंटरनेट के जरिए एएमयू में रिकॉर्ड किया जाए।

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