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केरल के मलप्पुरम में शुक्रवार 26 जनवरी को जमीदा टीचर ने इस्लाम धर्म के खिलाफ जाकर जुमे की नमाज़ अदा करायी है.

34 साल की जमीदा के रुप में जुम्मे की नमाज की इमामत कर इस्लाम के खिलाफ भारत के इतिहास में पहली बार किसी महिला ने इस तरह का कदम उठाया है.

कुरान सुन्नत सोसायटी की महासचिव जमीता ने मुस्लिम बहुल जिले में सोसायटी के कार्यालय में नमाज के दौरान इमाम की भूमिका निभायी. सोसायटी के सूत्रों ने बताया कि महिलाओं समेत करीब 80 लोगों ने इस नमाज में हिस्सा लिया.

जमीदा का इस बारें में कहना है कि  वो पुरुषों की बनायी रुढ़ियों को तोड़ना चाहती हैं. इस्लाम में कहीं नहीं लिखा है कि केवल पुरुष ही जुमें की नमाज़ अदा करवा सकते हैं. कुरान में किसी भी धार्मिक कृत्य या विश्वास को लेकर कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है.

हालांकि इस्लामिक विद्वानों के अनुसार जुम्मे की नमाज केवल मुस्लिम बालिगों पर फर्ज है. जुम्में की नमाज महिला, पागल, बच्चों पर फर्ज नहीं है. इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, महिलाओं पर जुम्मे के दिन रोजाना की तरह जौहर की नमाज ही फर्ज है.

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