लखनऊ: मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (MSO) के प्रदेश  उपाध्यक्ष आरिफ़ बरकाती का कहना है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद से, ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। गरीब लोगों के शोषण की खुली छूट दे दी गई है। कभी चेकिंग के नाम पर, कभी मास्क के नाम पर लोगों के जीवन को दूभर बना दिया गया।

उन्होने कहा, ऐसे माहौल में रामपुर की ताजा घटना हैरान करने वाली है। क़िला-ए-मौली में शहर के बीचों-बीच स्थित हज़रत ज़ंजीर शाह मियां का सदियों पुराना मजार रात के अंधेरे में जिला प्रशासन द्वारा ध्वस्त कर दिया गया, जिससे रामपुर के मुसलमानों में बेहद गुस्सा है।

MSO प्रदेश उपाध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन का यह कहना कितना हास्यास्पद है कि इस मजार के होने का कोई प्रमाण नहीं है, जबकि सदियों से वहां कब्रें और मकबरे थे, अब उन्हे निश्चित प्रमाण की जरूरत है। ये मजार प्राचीन है। इसके लिए पर्याप्त सबूत हैं, फिर भी अगर ऐसा है तो प्रशासन को उलेमाओं से जानकरी लेनी चाहिए थी।

बरकाती ने कहा, इस सबंध में पहले उलेमाओं से एक फतवा लिया जाना चाहिए था और फिर शरिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं किया गया और प्रशासन ने अपनी सीमाएं लांघी जो निंदनीय है। हम रामपुर जिला प्रशासन से मजार के पुनर्निर्माण करने और मुसलमानों की भावनाओं को आहत करने के लिए माफी की मांग करते  हैं।