rashmi

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कासगंज सांप्रदायिक हिंसा के मामले में सोशल मीडिया के जरिए पहले बरेली की डीएम और फिर सहारनपुर की महिला अफसर की और से सवाल उठाया गया. लेकिन दोनों को ही योगी सरकार की कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया से अपनी पोस्ट हटानी पड़ी.

डिप्टी डायरेक्टर (सांख्यिकी) रश्मि वरुण से योगी सरकार ने इस सबंध में स्पष्टीकरण मांगा है. जिसके बाद उन्होंने शनिवार को पोस्ट हटा दी. ध्यान रहे इससे पहले बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह पर भी कुछ इसी तरह की कार्रवाई  गई थी. जिसके बाद ने केवल उन्होंने अपनी पोस्ट हटा दी थी बल्कि इस मामले में सोशल मीडिया के जरिए सफाई भी पेश की थी.

क्या लिखा था रश्मि वरुण ने ?

रश्मि वरुण ने कासगंज सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय चंदन की मौत के लिए भगवाकरण को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने लिखा था, जो लड़का मारा गया, उसे किसी दूसरे तीसरे समुदाय ने नहीं मारा. उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा.

डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण

पोस्ट में उन्होंने लिखा था, यह थी कासगंज की तिरंगा रैली. यह कोई नई बात नहीं है. अम्बेडकर जयंती पर सहारनपुर के सड़क दूधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी. उसमें से अम्बेडकर गायब थे या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गये थे. कासगंज में भी यह ही हुआ. तिरंगा गायब और भगवा शीर्ष पर. उन्होंने लिखा, जो नहीं बताया जा रहा वह यह है कि अब्दुल हमीद की मूर्ति पर तिरंगा फहराने की बजाये रैली में चलने की जबरदस्ती की गई. केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया.

इस दौरान उन्होंने बरेली डीएम का भी समर्थन किया है. इमोजी के साथ डिप्टी डायरेक्टर ने लिखा है कि पाकिस्तान में जाकर नारे लगाकर मरना है क्या इन्हें. बरेली डीएम आर. विक्रम सिंह द्वारा इस मामले में सफाई देने पर उन्होंने कहा, देखिये सही बात का किस तरह अपना स्पष्टीकरण देना पड़ता है…सही इंसान को भी माफी मांगनी पड़ती है.

डिप्टी डायरेक्टर ने ये भी लिखा है कि यही सच है, न पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे, न तथाकथित तिरंगा यात्रा रोकी गई. ये सब व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी का खेल था.

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