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उत्तर प्रदेश के मदरसों के छात्रों के लिए कुर्ता-पाजामा के स्थान पर पैंट-शर्ट अनिवार्य करने को लेकर योगी सरकार ने अपने कदम वापस ले लिए है। इस मामले मे अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज विभाग के कैबनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने सरकार द्वारा ऐसा कोई नया कदम उठाये जाने की बात से इंकार करते हुए कहा कि सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है।

बता दे कि इससे पहले अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को घोषणा की थी कि मदरसा बोर्ड में एनसीईआरटी पाठयक्रम शुरू करने के बाद अब पारंपरिक कुर्ता- पायजामा के स्थान पर नया ड्रेस लागू किया जायेगा।

मोहसिन रजा ने कहा कि एक खास किस्म का कुर्ता पजामा पहनने से बच्चों में एक खास धर्म की पहचान दिखाई देती है, जो उन्हें उनमें हीन भावना पैदा करती है। इसलिए सरकार चाहती है कि वह भी मुख्यधारा में जुड़े। इसके लिए परंपरागत पहनावे के जगह पैंट शर्ट पहनना होगा।

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हालांकि अब नारायण ने अपने जूनियर मंत्री के बयान पर कहा कि यह उनकी अपनी राय हो सकती है। मोहसिन रजा के बयान के बाद योगी सरकार चौतरफा घिर गई थी।सपा नेता आजम खान ने कहा था कि योगी सरकार मदरसे के बच्चों को जींस पहना रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को भी जींस पहनना चाहिए।

उन्होने ये भी कहा था कि अगर ड्रेस कोड लागू ना हुआ तो सजा क्या होगी? मदरसा बुलडोज कर दिया जाएगा, बच्चे मार दिए जाएंगे, टीचर्स पर तेजाब डाला जाएगा, क्या किया जाएगा? उसकी सजा भी साथ-साथ हो तो ज्यादा अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि जो दिल चाहे करे। हर जुर्म की सजा भी घोषित करते चलें। ताकि एक बार फिर यह बात बहस में आए कि इंदिरा गांधी की इमरजेंसी क्या थी और नरेंद्र मोदी की इमरजेंसी क्या है।

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