Thursday, October 28, 2021

 

 

 

ब्राह्मणों के बंदूक लाइसेंस पर योगी सरकार ने पहले मांगी जानकारी, फिर पीछे हटी

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में ब्राह्मणों के पास मौजूद हथियार के लाइसेंस की गिनती करवाने का आदेश जारी किया। लेकिन इस आदेश को अचानक से वापस ले लिया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा में भाजपा के एक विधायक द्वारा राज्य में ब्राह्माणों की हत्या और बंदूकों के लाइसेंस से जुड़े आंकड़ों को लेकर एक सवाल पूछा था। इसके जवाब में यूपी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा कि कितने ब्राह्मणों ने हथियारों के लाइसेंस के लिए आवेदन किए और कितनों को लाइसेंस जारी किया गया।

राज्य के गृह विभाग के अवर सचिव प्रकाश चंद्र अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षरित यह पत्र 18 अगस्त को जारी किया गया था। इसमें 21 अगस्त तक जिलों से विवरण मांगा गया था। हालांकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने सरकार को इस मुद्दे पर पीछे हटने का संकेत दिया और कहा कि इसके विवरण पर अब आगे नहीं बढ़ा जा रहा है।

बता दें कि सुलतानपुर जिले का नाम बदलने का मामला उठा चुके लंभुआ सीट विधायक देवमणि द्विवेदी ने 16 अगस्त को उत्तर प्रदेश विधानसभा के मुख्य सचिव प्रदीप दुबे को एक नोट भेजा था। सरकार ने इसके जवाब में सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा कि कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया और कितनों को लाइसेंस जारी हुआ है।

द्विवेदी ने सरकार से पूछा था कि वर्तमान की भाजपा सरकार के करीब साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में कितने ब्राह्मणों की ह’त्या हुई है। इन ह’त्याओं को अंजाम देने वाले कितने लोग पकड़े गए हैं। प्रदेश सरकार इनमें से कितने लोगों को सजा दिलाने में सफल रही है। ब्राह्मणों की सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति क्या है। क्या ऐसी हालत में सरकार ब्राह्मणों को शस्त्र लाइसेंस देने में प्राथमिकता देगी।अभी तक इस सरकार के कार्यकाल में कितने ब्राह्मणों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया है और कितनों को लाइसेंस जारी हो गया है।

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