Monday, July 26, 2021

 

 

 

CAA विरोधियों के खिलाफ योगी सरकार पेश नहीं कर पाई सबूत, मिली जमानत

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उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक बार फिर से योगी सरकार द्वारा सबूत पेश न कर पाने के कारण नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने  को लेकर गिरफ्तार किए गए 15 प्रदर्शनकारियों को जमानत मिल गई। बता दें कि इन सभी को दं’गा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के दो जमानत बांड पर जमानत दे दी है। कोतवाली पुलिस ने 30 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

इससे पहले, जांच अधिकारी अमर सिंह ने इस मामले में, अदालत के समक्ष दो अलग-अलग आवेदन प्रस्तुत किए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 307 के तहत कोई मामला 21 दिसंबर को एंटी-सीएए विरोध के लिए गिरफ्तार 34 में से 26 के खिलाफ नहीं बनाया जा सकता है, जिसमें एक शख्स की मौ’त हो गई थी।

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपियों को पुलिस ने झूठा फंसाया था और लोग इस प्रकरण में शामिल नहीं थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने समर, अनस, रईस, रिजवान, अजहरुद्दीन, नजीर, अफरोज, शावेज, शहरोज, जुनैद खान, शाहनवाज, फहीम, मोहम्मद आबिद, सगीर और हम्जा को जमानत दे दी।

बचाव पक्ष के वकील सैयद अमीर मियां ने कहा कि रामपुर में दो एफआईआर दर्ज की गई थी। एक एफआईआर गंज थाने में और दूसरी कोतवाली थाने में। उन्होंने कहा, “महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस ने किसी को भी मौके से गिरफ्तार नहीं किया और अन्य लोगों के इशारे पर जल्दबाजी में लोगों को गिरफ्तार किया। जमानत के पीछे का आधार यह है कि जांच के दौरान (धारा) 302, 307, 395 को हटा दिया गया।”

मैंने पूछा कि पुलिस ने इन धाराओं को क्यों हटाया और जब इन लोगों को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया तो इन धाराओं को क्यों लागू किया गया। आमिर ने आगे कहा कि दिसंबर में हुई हिं’सा के सिलसिले में कम से कम 34 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें जिला प्रशासन ने 26 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती के आरोप हटा दिए थे।

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