उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तीन तलाक की तुलना ‘द्रौपदी के चीरहरण’ से करने पर उलेमा भडक चुके हैं. उलेमाओं ने योगी के बयान को जाहिलाना बयान करार दिया हैं.

दरअसल योगी ने तीन तलाक को लेकर कहा, ‘‘कुछ लोग देश की इस (तीन तलाक) ज्वलंत समस्या को लेकर मुंह बंद किये हुए हैं, तो मुझे महाभारत की वह सभा याद आती है, जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था, तब द्रौपदी ने उस भरी सभा से एक प्रश्न पूछा था कि आखिर इस पाप का दोषी कौन है.”

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उन्होंने आगे कहा, ‘तब कोई बोल नहीं पाया था, केवल विदुर ने कहा था कि एक तिहाई दोषी वे व्यक्ति हैं, जो यह अपराध कर रहे हैं, एक तिहाई दोषी वे लोग हैं, जो उनके सहयोगी हैं, और वे भी दोषी हैं जो इस घटना पर मौन हैं.”

योगी के इस बयान पर आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा, ‘‘ऐसे जाहिलाना बयान पर कोई प्रतिक्रिया देना मैं जरुरी नहीं समझता. तलाक के मसले की द्रौपदी के चीरहरण से तुलना तो कोई जाहिल ही कर सकता है.’

वहीँ आल इण्डिया शिया पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि तलाक और द्रौपदी के चीरहरण में अन्तर है. दोनों के बीच तुलना नहीं की जानी चाहिये. आल इण्डिया मुस्लिम वूमेन पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने भी कहा, ‘‘तलाक के मामले की द्रौपदी के चीरहरण से तुलना नहीं की जानी चाहिये. अगर योगी इसे तर्क के रुप में पेश कर रहे हैं तो यहां हिन्दू महिलाओं को भी दहेज के लिये जलाया जा रहा है. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को उनकी समस्याओं पर भी ऐसी ही टिप्पणी करनी चाहिये।’’

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