Monday, June 14, 2021

 

 

 

‘तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने पर हत्या के प्रयास की धारा लगाना कानून का दुरुपयोग’

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नई दिल्ली में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने पर युवक के खिलाफ “हत्या के प्रयास” के आरोपपत्र दाखिल करने को कानून की शक्ति का दुरुपयोग माना है।

न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कहा कि “इस मामले पर विचार की जरूरत है।” हाईकोर्ट ने याची मोहम्मद साद के खिलाफ मऊ के जुवेनाइल जस्टिस  बोर्ड में  धारा 307 व 270 आईपीसी के तहत दाखिल आरोप पत्र में मुकदमा की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है।

मोहम्मद साद के वकील ने आरोप लगाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपपत्र में कहा है कि आवेदक ने नई दिल्ली में तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। हालांकि याची का कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया था। साथ ही प्रशासन ने भी याची को क्वारंटाइन नहीं किया था।

बावजूद पुलिस ने पहले इस मामले में आईपीसी की धारा 269 (संक्रमण फैलाने के लिए उपेक्षापूर्ण काम करना) और 270 (जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारी फैलाना) के अन्तर्गत आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में  क्षेत्राधिकारी के कहने पर आरोप पत्र में संशोधन किया गया और 307 व 270 आईपीसी के तहत संशोधित आरोप पत्र दाखिल किया गया।

कहा गया है कि प्राथमिकी में दर्ज आरोप को  यदि  सही भी मान लिया जाए तो याची के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाना सही नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी, एसएसपी मऊ, व क्षेत्राधिकारी को भी पक्षकार बनाने को कहा है।

HC ने अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता को, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, 10 दिनों के भीतर मामले में “जवाबी जवाब” दायर करने का निर्देश दिया।

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