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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने साम्प्रदायिक सोहार्द की बड़ी मिसाल पेश की है. मुस्लिमों ने धन एकत्रित कर एक गरीब हिन्दू लड़की की शादी कराने में मदद की.

प्राप्त जानकारी के अनुसार मालदा जिले के के गाँव में सरस्वती नाम की लड़की की शादी पास के ही गाँव में तय हुई थी. सरस्वती के पिता का तीन साल पहले ही देहांत हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद ही खराब  होने के कारण मां शोभारानी दिहारी पर मजदूरी करती है.

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ऐसे में बेटी की शादी के लिए शोभारानी  बस 2 हजार रुपए ही दहेज के तौर पर जमा कर पाई. जब गांव के मुस्लिमों को शोभारानी की इस परेशानी के बारें में जानकारी मिली तो उन्होंने सरस्वती की शादी का जिम्मा उठाने का फैसला किया.

स्थानीय मदरसा के हेडमास्टर मोतिउर रहमान ने नेतृत्व में सभी मुस्लिमों ने शादी के लिए पैसे इकट्ठा किया. जिसके बाद सबने मिलकर 25 नवंबर को सरस्वती की शादी कराई. ध्यान रहे इस गांव में 600 मुस्लिम परिवारों के बीच बस 8 ही हिन्दू परिवार रहते हैं.

रहमान ने कहा, अगर सरस्वती के पिता जिंदा होते तो वे अपनी बेटी की शादी कुछ ऐसे ही करते,वो अब हमारी बेटी जैसी है.

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