केरल, पंजाब, राजस्थान के बाद अब पश्चिम बंगाल सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया है। पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्य मंत्री पार्था चटर्जी ने विधानसभा में दोपहर करीब दो बजे सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से सीएए को रद्द करने, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की योजनाओं पर काम नहीं करने की अपील की गई है। सीपीएम ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया है। सीपीएम ने कहा कि उन्होंने कई बार CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने को कहा, लेकिन सरकार ने जान बूझकर देरी की।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले दिनों दावा किया था कि केंद्र सरकार सिर्फ गैर बीजेपी शासित राज्यों में सीएए को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा था, “हम तीन महीने पहले एनआरसीए के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। हम सीएए के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित करेंगे।”

पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्र फिरहाद हाकिम ने कहा कि हमलोग बंगाल में रहते हैं, और स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर के आदर्शों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि हम धर्मनिरपेक्ष राज्य में विश्वास करते हैं। कांग्रेस और सीपीएम पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि एनआरसी के खिलाफ हमने सबसे पहले प्रस्ताव लाया।

तेलंगाना भी लाएगा प्रस्ताव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) ने भी नागरिकता संसोधन कानून (CAA) का विरोध किया है। उनका कहना है कि सीएए एक गलत फैसला है। सीएम केसीआर ने कहा, ‘हम एक विशेष सत्र बुलाकर सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव लाएंगे। हम जल्द ही इस मुद्दे पर दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) देश को हिंदू राष्ट्र बना रही है।’

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