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हमेशा अपने बयानों के जरिए विवादों मे रहने वाले शिया वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने देवबंद के उलेमाओं को आतंक का चेहरा बताकर नया विवाद पैदा कर दिया। उनका ये बयान देवबंदी उलेमाओं के मोहर्रम पर मातम को नाजायज करार देने के जवाब में आया है।

रिजवी ने कहा की इमाम हुसैन की शहादत पर मातम मनाना देवबंदी मौलाना को क्यों खलता है। वसीम रिजवी ने कहा की हम इमाम हुसैन के नाम पर खुद को तकलीफ़ देते हैं तो यह उनको नाजायज लग रहा है, ये कतई नाजायज नहीं हो सकता।

उन्होंने देवबंदी उलेमाओं द्वारा दिए गए बयान की कड़ी निंदा करते हुए वसीम रिजवी ने कहा कि देवबंदी उलेमा दूसरों का सिर काटना, तलवार की नोक पर जिहाद और हलाला की तरफदारी करते हैं।

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बता दें कि देवबन्दी उलेमाओं ने अपने बयान में कहा कि मोहर्रम एक मुबारक महीने में आता है। उन्होंने बताया कि इसमें हमारे इस्लाम और शरीयत ये नहीं कहता की तलवारों के साथ मातम किया जाए, इसलिए ये नाजायज हैं।

पश्चिम बंगाल में नखोडा के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वह शुक्रवार को मुहर्रम के दौरान हथियारों के साथ जुलूस निकालने से बचें, क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ है।

मौलाना कासमी ने कहा, ‘‘हमारे इस्लामी कानूनों में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि मुहर्रम के दौरान हथियारों के साथ जुलूस निकालना चाहिए।’’

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