Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

देवा शरीफ में गूंजी तहफ्फुजे नामूसे रिसालत बिल की आवाज़

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देवी शरीफ

रज़ा अकैडमी के सरबराह असीर मुफ़्ती-ए-आज़म हिंद क़ायदे मिल्लत अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी साहिब ने आस्ताना आलम पनाह सरकार हाजी वारिस अली शाह की बारगाह में हाज़िरी दी। आस्ताना आलीया पर हाज़िरी के बाद तहफ्फुज़े नामूसे रिसालत के सिलसिला में एक तक़रीब का इनइक़ाद किया गया।

इस मौके पर रज़ा अकैडमी के सरबराह अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी ने कहा कि आज कुछ शर पसंद अनासिर मज़हबी मुनाफ़िरत फैला कर ना सिर्फ मुस्लमानों के जज़बात को ठेस पहुँचा रहे हैं बल्कि सविधान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग भी हमारे प्यारे आक़ा की शान में गुस्ताख़ी करते हैं वो जान लें कि मुस्लमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है। लेकिन रसूलﷺ की शान अक़्दस में ज़रा सी भी तौहीन किसी हालत में बर्दाश्त नहीं कर सकता है.

सईद नूरी ने मज़ीद कहा कि जिस तरह से आए दिन रसूलﷺ की शान में गुस्ताख़ी की जा रही है इस से नक़से अमन का ख़तरा पैदा हो सकता है। इस लिए हकूमत-ए-हिन्द इस मुआमला में संजीदगी इख़तियार करते हुए एक ऐसा क़ानून बनाए जिससे मज़हबी पेशवाओं के गुस्ताखों को सज़ा दी जाये.

इस मौक़ा पर मौलाना मुहम्मद आज़म हशमती सदर पासबान वतन आफ़ इंडिया ने कहा कि हम अपने आख़िरी सांस तक तहफ्फुज़े नामूसे रिसालत के लिए कोशिश करते रहेंगे।उन्हों कहा कि गुज़शता कई सालों से हुज़ूर की शान में, औलिया-ए-किराम की शान में गुस्ताख़ी की जाती है। लेकिन इस के बावजूद हुकूमतें कुछ नहीं कर रही हैं। हम मुतालिबा करते हैं कि इस क़ानून को जल्द अज़ जल्द अमली जामा पहनाया जाये.

तक़रीब का इख़त्ताम हज़रत की दुआ पर हुआ। इस मौके पर मौलाना इरशाद अहमद सकाफ़ी, अहमद रज़ा नूरी मियां, मौलाना जमाल अख़तर सदफ़ समेत देवा शरीफ़ व अतराफ़ के कसीर तादाद में उल्मा मौजूद थे.

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