कथित गौरक्षा के नाम पर देश में अल्पसंखयकों और दलितों पर अत्याचार के बीच यूपी के कानपुर में ऐसा मामला सामने आया है। जिसने गौरक्षा की पोल खोल के रख दी है।

जानकारी के अनुसार, नैशनल हाइवे-2 पर भगवा गमछा डाल गौरक्षक पशु व्यापारी से अवैध वसूली कर रहे थे। इस दौरान उन्होने पशु व्यापारियों के साथ मारपीट भी की। जिसके बाद ग्रामीणों ने गौरक्षकों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। हालांकि पुलिस ने कोई कार्रवाई करने के बजाय समझौतानामा लिखवा लिया।

बता दें कि पशु व्यापारी कानपुर के नजदीक स्थित फतेहपुर जिले में शुक्रवार को मवेशियों बाजार में पहुंचे थे। शुक्रवार दोपहर हाथीपुर गांव का अब्बास अपनी डीसीएम गाड़ियों में भैंसों को लेकर लौट रहा था। महाराजपुर क्षेत्र में हाइवे पर गोरक्षकों ने अब्बास को रोक उससे 10 हजार रुपये मांगे। इनकार करने पर गोरक्षकों ने अब्बास की पिटाई की।

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हालांकि बाद में अब्बास ने उन्हें दो हजार रुपए देने का बहाना बनाकर बचने की सोची, जिस पर हमलावरों ने मोटरसाइकिल से अब्बास का पीछा किया। सरसौल चौकी के पास चारों आरोपियों ने चलते वाहन की स्टियरिंग व्हील काबू कर ली, जिसके बाद वह वाहन एक ट्रैक्टर से जा टकराया।

अब्बास को इसके बाद चारों ने पीटना शुरू कर दिया। यह देख प्रधान के पति रज्जन शुक्ला, अशरफी और राम मिलन वहां आए तो हमलावरों ने उन्हें पीट दिया। इसके बाद उन्होंने कुछ और गांव वालों को मदद के लिए बुला लिया, जिसके बाद जमकर उन चारों की पिटाई हुई। लाठी-डंडों से पीटते हुए आरोपियों को चौकी ले जाया गया था। इतना ही नहीं  उन्होंने चौकी के भीतर भी आरोपियों को पीटा।

लेकिन पुलिस ने बीच-बचाव के बाद समझौता करा दिया था। मगर उसी दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया।आरोपियों को बचाने और समझौता कराने से जुड़ी यह क्लिप वायरल हुई, तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पुलिस ने इसके बाद दोनों पक्ष के चार-चार लोगों को हिरासत में लिया और फिर रिपोर्ट लिखी।

आरोपियों की पहचान विक्की, रवि, आशीष और दिवाकर के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, मामले में लापरवाही बरतने को लेकर बृजेश नामक सिपाही को निलंबित किया गया है।

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