योग गुरु से व्यापारी बने बाबा रामदेव के राजस्थान में प्रस्तावित ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के लिए राज्य की वसुंधरा सरकार ने नियमों की धज्जियां उड़ा के रख दी है। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर फूड पार्क खोलने के लिए करौली में वसुंधरा सरकार ने ये जमीन दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने जिस जमीन को पतंजलि ट्रस्ट को देने का फैसला किया है, हकीकत में वह मंदिर माफी की जमीन है। इस जमीन पर योगपीठ, गुरुकुल, आयुर्वेदिक अस्पताल, आयुर्वेदिक दवाइयों का उत्पादन केंद्र और गोशाला का निर्माण होना है।

इसका शिलान्यास 22 अप्रैल को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और स्वामी रामदेव के हाथों से हो चुका है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। वजह है ज़मीन का कृषि से व्यवसायिक श्रेणी में नियमन नहीं होना।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

दरअसल, मंदिर के नाम ज़मीन का अर्थ यह है कि ज़मीन मंदिर में स्थापित मूर्ति की है।  नियमों के मुताबिक इस ज़मीन को मंदिर का ट्रस्ट न तो बेच सकता है और न ही ग़ैर कृषि कार्य के लिए लीज़ पर दे सकता है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मंदिर माफी की इस जमीन पर गोविंद देवजी ट्रस्ट का मालिकाना हक नहीं है। इस पर खुद गोविंद देवजी का अधिकार है, ऐसे में ट्रस्ट बिना मालिकाना अधिकार के कैसे इस जमीन को 30 साल के लिए किसी दूसरे ट्रस्ट को हस्तांतरित कर सकता है।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर 21 जून को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बाबा रामदेव की मौजूदगी में 403 बीघे जमीन को पतंजली ट्रस्ट को 30 साल के लीज पर दिया जाएगा। जिसकी कीमत 400 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

Loading...