उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पर चुनाव आयोग द्वारा आरोप लगाया जा रहा है. दरअसल चुनाव आयोग ने उन पर अपनी संपत्तियों की गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है. इस मामले की जानकारी चुनाव आयोग को भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता रघुनाथ सिंह नेगी ने दी थी. जिस पर चुनाव आयोग ने उनकी संपत्ति की जांच के आदेश दिए है.

पूर्व भारतीय जनता पार्टी के नेता ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की थी. जिसके चलते चुनाव आयोग ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को मुख्यमंत्री की संपत्ति की जांच के आदेश दिए है. ख़बरों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड CBDT को 19 दिसंबर को एक लैटर लिखा था जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से जुड़े मामले की जानकारी दी थी.

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) को आदेश मिले है कि मुख्यमंत्री की संपत्तियों की कीमतों का आंकलन करके इस बारे में एक क्लियर रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी जाए. आपको बता दें कि पूर्व भारतीय जनता पार्टी नेता रघुनाथ सिंह नेगी 2010 में गढ़वाल मंडल विकास निगम के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं. नेगी के मुताबिक, मुख्यमंत्री रावत ने 9,56,000 रुपये में तीन आवासीय संपत्तियों को खरीदने की जानकारी दी है. जबकि संपत्ति की असल मार्केट वैल्यू इससे कई गुणा ज़्यादा है.

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पूर्व भारतीय जनता पार्टी के नेता ने यह आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग को दिये शपथपत्र में त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपनी कई स्थित संपत्तियों की कीमत काफी कम दिखाई है. पूर्व भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री पर यह भी आरोप भी लगाया है कि उन्होंने चुनाव आयोग को अपनी उम्र की भी गलत जानकारी दी है. कानून के मुताबिक, अगर कोई शख्स चुनाव आयोग को दिए शपथपत्र में गलत जानकारी देता है तो उसे 6 महीने की सज़ा और जुर्माने का भुगतान भी करना होता है.

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