केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पिछले दो सालों से घाटी में हुए बदतर हालातों को अब सुधारने के लिए दिनेश्वर शर्मा वार्ताकार नियुक्त किया गया है. हालांकि उनकी अब तक अलगावादियों से मुलाकात नहीं हो पाई है. इसी बीच अलगाववादी संगठनों ने बातचीत से पहले अपनी मांगे सामने रख दी है.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने मोदी सरकार से घाटी में में पैलट गन  के इस्तेमाल पर रोक, जेलों में बंद कश्मीरी युवाओं की रिहाई, इसके साथ ही बातचीत में पाकिस्तान को भी एक पक्ष के रूप में शामिल करने की मांग की है. हुर्रियत लीडर सैयद अली शाह गिलानी के विश्वासपात्र देविंदर सिंह बहल ने ये मांगे पेश की है.

बहल ने कहा कि हम सरकार को बताना चाहते हैं कि एक में दिन सत्तर साल पुराने मुद्दे को नहीं सुलझाया जा सकता है. हम भारत सरकार को बता देना चाहते हैं कि अगर आप कश्मीर मुद्दे पर उत्सुक हैं तो सबसे पहले आपको पैलट गन पर लगानी होगी. जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद सभी युवा राजनीतिक कैदियों को रिहा करना होगा.

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उन्होंने अपनी मांगे बताते हुए आगे कहा कि  श्रीनगर सहित गांव और घाटी के हर इलाके से सरकार को सेना के बंकर हटाने होंगे. इसके अलावा बातचीत के लिए सरकार को कश्मीर और पाकिस्तान के नेतृत्व को भी शामिल करना होगा. क्योंकि जबकि जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर जबतक पाकिस्तान और कश्मीरी नेतृत्व शामिल नहीं होगा तब कश्मीर मुद्दा नहीं सुलझ सकता.

इसी के साथ इन मांगों के बिना अलगाववादी नेताओं ने दिनेश्वर शर्मा  से मिलने से भी इंकार कर दिया है. अलगाववादी नेताओं का समूह संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व (जेआरएल) ने कहा कि शर्मा की नियुक्ति ‘अंतर्राष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय मजबूरी’ की वजह से अपनाई गई रणनीति का हिस्सा है.

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