शहद से मीठी जुबान उर्दू आखिरकार तेलंगाना की दूसरी आधिकारिक भाषा बन गई है. तेलंगाना आधिकारिक भाषा (संशोधन) विधेयक 2017 के तहत उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित किया गया है.

इस अधिनियम का विधानसभा में सभी दलों ने समर्थन किया. ध्यान रहे राज्य में उर्दू बोलने वालों की अच्छी खासी संख्या है जो सभी 31 जिलों में फैली हुई है.

इससे पहले अविभाजित आंध्र प्रदेश में तेलंगाना आधिकारिक भाषा अधिनियम 1966 की धारा दो के तहत तेलंगाना क्षेत्र के खम्माम को छोड़कर नौ जिलों में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था.

बयान में कहा गया कि उर्दू भाषी जनसंख्या का प्रतिशत राज्य की कुल जनसंख्या का 12.69 है. सरकार ने तेलंगाना आधिकारिक भाषा अधिनियम 1966 की धारा दो में जरूरी संशोधन करके पूरे तेलंगान प्रदेश में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित करने का फैसला किया है.

इस फैसले पर एमआईएम नेता अकबरूद्दीन ओवैसी ने कहा कि इससे पहले उर्दू के साथ न्याय नहीं किया गया था. उन्होंने इस भाषा के संरक्षण के लिए अपने पिता और दिवंगत एमआईएम नेता सलाहुद्दीन ओवैसी तथा अन्य के प्रयासों को याद किया.

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