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राजधानी लखनऊ में नियुक्ति की मांग कर रहे 2011 के बीएड-टीईटी अभ्यर्थियों पर जमकर लखनऊ पुलिस ने लाठियां भांजी. जिसके विरोध में अभ्यर्थियों ने भी पुलिस पर जमकर पत्थर बरसाए.

इस घटना के बाद आलमबाग थाने के इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में 19 लोगों को नामजद करते हुए कुल 3000 पुरूष और 80 महिलाओं के खिलाफ बलवा, मारपीट, सरकारी संपत्ति को नुकसान, 7 सीएलए की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.

अभ्यर्थियों और पुलिस की भिड़ंत में कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए. इस हंगामे में रोडवेज बस और कई गाड़ियों के शीशे भी टूटे. दरअसल नियुक्ति की मांग लेकर हजारों अभ्यर्थी विधानसभा घेराव करने जा रहे थे.

बता दें कि 30 नवंबर 2011 में 72,825 पदों पर भर्ती निकाली गई थी. इन पदों पर टीईटी के अंकों पर भर्ती होनी थी, जिसे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट इलाहबाद में चैलेंज किया था. अभ्यर्थियों ने अकादमिक मेरिट पर भर्ती की मांग रखी थी.

इसी बीच 2012 में सपा सरकार आ गई और सरकार ने टीईटी मेरिट पर आधारित विज्ञापन को रद्द करके, 7 दिसंबर 2012 को 72825 पदों के लिए अकादमिक मेरिट के आधार पर नया विज्ञापन जारी किया गया. पुराना मामला कोर्ट में चलता रहा. मुकदमे के दौरान इलाहबाद कोर्ट ने पुराने विज्ञापन को भी सही मानते हुए, उस पर ही भर्ती का आदेश दिया.

 यह आदेश नवंबर 2014 में आया. सपा सरकार ने विज्ञापन बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. अभ्यर्थियों के अनुसार 25 जुलाई 2017 को SC ने अपने आदेश में नए विज्ञापन को सही मानते हुए अब तक हुए अंतरिम आदेशों पर हुई भर्तियों को सुरक्षित करते हुए, नए विज्ञापन पर भी भर्ती की सरकार को छूट दी. लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी भर्ती नहीं हो सकी है.

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