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उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओ.पी.सिंह ने बुलंदशहर में हुई हिंसा को बड़ी साजिश के तौर पर माना है। वह खुद इस सवाल का जवाब तलाशने में जुटे है कि आखिर गोवंशीय अवशेष वहां पहुंचे कैसे?

न्यूज़ 18 से बात करते हुए यूपी के डीजीपी ने कहा, “मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह सारी घटनाएं कानून व्यवस्था की ही सिर्फ नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे षड्यंत्र है। अब तक की जांच में हमें यह पता चला है कि इसमें कोई साजिश की बात है, जिसे कुछ लोगों ने रची थी।”

डीजीपी ओपी सिंह ने आगे कहा, “आखिर क्या बात थी कि यह घटना 3 दिसंबर को ही हुई। यह बात क्यों कही जा रही है कि गोकशी की घटना हुई थी। गायों को काटा गया, उनके मांस को वहां लाया गया। किसी बाहुल्य क्षेत्र में रखा गया। इन सब चीजों पर हम विचार करेंगे। हमने जांच टीम से यह कहा है सबसे पहले वे हमें इस षड्यंत्र का पता लगाकर बताएं। हमरी यह जानने की कोशिश है कि आखिर क्या वजह है कि यह घटना घटी। अगर हम कानून-व्यवस्था कहकर इसे खत्म कर देते हैं तो इस घटना के तह तक नहीं जा पाएंगे।”

बता दें कि सोमवार को गोकशी की अफवाह पर बुलंदशहर के स्याना गांव में भड़की हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो लोगों की जान चली गई थी। बता दें कि पुलिस ने इस मामले में 87 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें से 27 नामजद हैं और 60 अज्ञात। कुछ आरोपी बजरंग दल, भाजपा और विहिप जैसे संगठनों से जुड़े हैं।

मुख्य आरोपी बजरंग दल का जिला संयोजक योगेश राज है। स्याना में भाजपा यूथ विंग का अध्यक्ष शिखर अग्रवाल और विहिप कार्यकर्ता उपेंद्र राघव भी नामजद हैं। यह सभी फरार हैं। एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि बुलंदशहर हिंसा के मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।

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