एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की हैं. वहीँ ये जीत मुस्लिमों के लिए सबसे बड़ी नुकसानदायक साबित हुई हैं. पिछले 50 सालों में यूपी विधानसभा में सबसे कम मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व इस बार होगा.

1967 के बाद से अब पहली बार यूपी की विधानसभा में सबसे कम मुस्लिम उम्मीदवार पहुंचे हैं. इस बार विधानसभा पहुँचने वाले मुस्लिम विधायकों की संख्या केवल 23 ही रह गई हैं. इसकी वजह बीजेपी की और से किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देना नहीं हैं.

2012-17 विधान सभा में सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक यूपी की विधानसभा में थे. जो इस बार के मुस्लिम संख्या के दुगुने से भी अधिक थे. उनकी संख्या 68 थी.

इस बार विधानसभा में पहुंचने वाले सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक सपा से आये हैं. 23 में से 17 विधायक सपा से हैं. जबकि बीएसपी के चार मुस्लिम उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे हैं. वहीं कांग्रेस के सात में से दो विधायक मुस्लिम हैं.

बीजेपी की जीत के साथ ही मुस्लिम विधायकों की संख्या कम होना लाजिमी हैं. इसके अलावा दलित विधायकों की संख्या भी 85 पर ही है.

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