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मध्यप्रदेश के उज्जैन में उस वक्त एक अलग ही नजारा देखने को मिला. जब तेज बारिश ने पवित्र स्नान के लिए उज्जैन पहुंचे हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए रहने की मुसीबत पैदा कर दी. ऐसे में उन्होंने मस्ज़िद में रात बिताई.

दरअसल, अचानक हुए तेज़ बारिश में श्रद्धालुओं के लिए कोई इंतिज़ाम न होने के कारण आसपास के मुसलमानों ने श्रद्धालुओं के लिए एक मस्जिद में उनके रुकने और सोने का इंतिज़ाम किया.

ये मामला ऐसे समय में सामने आया. जब मध्यप्रदेश चुनावी सरगर्मियों में है. राजनीतिक फायदे के लिएहिंदू मुस्लिम में ज़हर घोलने के लिए नफरत भरे बयान दिए जा रहे है. ऐसे में ये एक बड़ी मिसाल है.

हालांकि गंगा-जमुनी तहजीब देश की जनता में सदियों से बसी हुई है. यदि इतिहास को निष्पक्ष ढंग से पढ़ा जाए, तो साफ हो जाएगा कि मध्यकालीन भारत में अनेक हिंदू तीर्थ-स्थलों को मुस्लिम शासकों का संरक्षण व सहायता प्राप्त हुई. इन तीर्थ-स्थलों के विकास में उस सहायता का महत्वपूर्ण योगदान था.

मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के लगभग 35 मंदिरों के लिए मुगल शासकों अकबर, जहांगीर व शाहजहां से सहायता मिलती रही. इसके दस्तावेज आज तक उपलब्ध हैं. लगभग 1,000 बीघे जमीन की व्यवस्था इन मंदिरों के लिए की गई थी.

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