अगरतला: काले मास्क पहने हुए, त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों के पत्रकारों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के खिलाफ पिछले महीने दिये गए कथित मीडिया विरोधी बयान के विरोध में प्रदर्शन किया।

असेंबली ऑफ जर्नलिस्ट (एओजे) के बैनर तले मीडियाकर्मी यहां रवीन्द्र भवन के सामने एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। AOJ के संयोजक शेखर दत्ता ने कहा, “जब तक वह (देब) अपनी टिप्पणी वापस नहीं ले लेते, तब तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।”

देब ने 11 सितंबर, 2020 को दक्षिण त्रिपुरा जिले के सबरूम में एक विशेष आर्थिक क्षेत्र की आधारशिला रखते हुए कहा था कि कुछ अखबार राज्य के लोगों को इसकी COVID-19 स्थिति के बारे में भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं और वह इसे माफ नहीं करेंगे।”

उन्होने कहा, “कुछ अखबार लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं… इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा, त्रिपुरा के लोग उन्हें माफ नहीं करेंगे और मैं बिप्लब देब उन्हें माफ नहीं करूंगा। मैं जो कुछ भी कहता हूं वह करता हूं, इतिहास इस बात का प्रमाण है।“

पत्रकारों इसे पनले लिए खतरा माना। उन्होने मांग की कि सीएम इस बयान को वापस लें। देब अपनी टिप्पणी से पीछे नहीं हटे लेकिन उन्होंने कहा कि उनके भाषण में किसी को धमकी देने का मतलब नहीं था। विरोध प्रदर्शन के दौरान, AOJ के चेयरमैन सुबल कुमार डे ने कहा कि सीनियर स्क्राइब की दो टीमों ने हाल ही में राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और पाया कि जिलों में पत्रकारों के पेशेवर अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है।

उन्होने कहा, जिले और उप-विभागीय शहरों में काम करने वाले पत्रकार गंभीर दबाव में काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा जारी किए गए एक गैग आदेश के कारण कोई भी सरकारी अधिकारी उनसे बात नहीं करना चाहता है और माफिया तय कर रहे हैं कि समाचारों को कैसे प्रकाशित किया जाए।

AOJ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सीएम के 11 सितंबर, 2020 के बयान के बाद से कम से कम छह पत्रकारों के साथ मारपीट की गई और शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई। उनमें से किसी में जांच नहीं की गई है।

Loading...
विज्ञापन
अपने 2-3 वर्ष के शिशु के लिए अल्फाबेट, नंबर एंड्राइड गेम इनस्टॉल करें Kids Piano