उन्नाव: मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इंडिया (एमएसओ) की उन्नाव ज़िला यूनिट के तत्वाधान में मौलाना अबुल कलाम आजाद, स्वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री की पुण्यतिथि (22 फरवरी) पर “मौलाना आज़ाद और शिक्षा की धरोहर” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन दारुल उलूम अहले सुन्नत मन्ज़रे इस्लाम, क़ासिम नगर उन्नाव में किया गया। सेमिनार का संचालन मौलाना हस्सान क़ादरी ने किया।

अबुल कलाम आज़ाद की पुण्य तिथि पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए एमएसओ के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अबू अशरफ ने कहा कि आज के दौर में इल्म ही हमें समाज में इज़्ज़त दिला सकता है, हमारे बुजुर्गों जैसे अबुल कलाम आज़ाद, एपीजे अब्दुल कलाम आदि लोगों ने इल्म हासिल करके न केवल अपना नाम किया अपितु देश को भी उन्नति की ओर अग्रसर किया।

उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जानना चाहिए और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर समाज में अमन का पैगाम भी देना चाहिये। कानपुर से आए सय्यद आसिम जमाल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि लोग और समाज हमारी तभी मदद कर सकते हैं जब हम अपनी मदद ख़ुद करें और वह अच्छी शिक्षा और तालीम हासिल करके ही की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि दीनी तालीम के साथ-साथ साइंस, टेक्नोलॉजी और दूसरे क्षेत्रों का ज्ञान भी प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने अराजक तत्वों द्वारा फैलाई जा रही अफवाह कि हुकूमत मुसलमानों को नौकरी नहीं देती है। बिल्कुल ग़लत है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी कमियों को हुकूमत पर नहीं थोपना चाहिये। उन्होंने छात्रों का आहवाहन करते हुए कहा कि उनहें मेहनत करके सफल होकर अपने को साबित करना चाहिए जैसा कि ए पी जे अब्दुल कलाम ने किया।

दूरुल उलूम मन्ज़रे इस्लाम के प्रिंसिपल मौलाना शुएऐब मिस्बाही ने मदरसा तालीम के साथ-साथ साइंस और टेक्नोलॉजी के ज्ञान लेने पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज मुसलमान हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रहा है और हमें चाहिये कि हमारी आने वाली नस्लें भी पढ़ लिख कर न सिर्फ हमारी क़ौम की भागीदारी बढ़ाएँ बल्कि समाज को भी एक रखने में सहायक बनें। इस अवसर पर हाफिज़ अरफात रज़ा बलरामपुर व हाफिज़ उज़ैर रज़ा उन्नाव को एक बैठक में क़ुरआने पाक सुनाने पर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में आए अन्य वक्ता मौलाना सालिम मिस्बाही, मौलाना हस्सान क़ादरी आदि ने भी शिक्षा के माध्यम से मुल्क की तरक़्क़ी और समाज के उत्थान पर ज़ोर देते हुए बच्चों को समाज में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। सेमिनार में मौलाना हस्सान क़ादरी, क़ारी अब्दुल अलीम बरकाती, हाजी इश्तियाक़ बरकाती, मोहम्मद फारूक़ बरकाती, मोहम्मद कामरान समेत बड़ी संख्या में स्थानीय युवा लोगों ने भाग लिया।