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मुजफ्फरनगरः पिछले 8 सालों में जिले में पुल का निर्माण ना होने के कराण आए दिन हो रही दुर्घटनाओं के चलते मुस्लिम समुदाय ने मस्जिद और मदरसे को हटाने की इजाजत दे दी है.

ये इजाजत दुर्घटना में हो रही लगातार मौतों के चलते जिंदगी बचाने को लेकर दी गई. दरअसल, संधावली पुल पर बीते सात साल में 70 से अधिक परिवारों के घरों के चिराग हादसों में बुझ गए. प्रशासन की और से कोई रास्ता ना निकाल पाने के कारण आखिरकार मस्जिद और मदरसे को हटाने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुशी-खुशी इजाजत दे दी.

प्रशासन द्वारा मुस्लिम समुदाय की इस कदम का प्रोत्साहन करने के लिए मस्जिद के बैंक खाते में 49 लाख रुपये जमा किए गए हैं, ताकि किसी अन्य स्थान पर मदरसे और मस्जिद का निर्माण कराया जा सके.

आप को बता दें कि मुजफ्फरनगर के संधावली गांव के पास रेल लाइन के ऊपर पुल का काम काफी समय से अधूरा पड़ा हुआ था. चार लेन के करीब दो किलोमीटर लंबे इस पुल का मेरठ से देहरादून की तरफ जाने वाला दो लेन के हिस्से का काम तो काफी पहले ही पूरा करवा दिया गया था.

लेकिन मेरठ से देहरादून की ओर से रही दो लेन का निर्माण नीचे मस्जिद और मदरसे के कारण नहीं हो पाया था. पुल को किसी तरह की क्षति ना हो और वक्त आने पर इसका निर्माण कार्य पूर्ण किया जा सके, इसके लिए प्रशासन द्वारा एक दीवार बना दी गई थी, जो रात के अंधेरे में अक्सर लोगों को नजर नहीं आती थी. रात के समय दीवार ना दिखने के कारण अक्सर लोग इससे टकरा जाते थे और उनकी मौत हो जाती थी.

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