उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में  भाजपा विधायकों सहित हजारों लोगों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए शहर में स्वामी विरक्तानंद उर्फ ​​शोभन सरकार को अंतिम विदाई दी।

शोभन सरकार ने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब केंद्र सरकार के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2013 में यूपी के उन्नाव जिले में एक पुराने किले में खुदाई का काम किया था, दरअसल शोभन सरकार को सपना आया था कि खंडहर के नीचे एक हजार टन सोना है। हालांकि एएसआई को खुदाई के बाद वहां कुछ नहीं मिला था।

फिर भी संत का ऐसा प्रभाव था कि बीजेपी सांसद देवेंद्र सिंह भोले, भगवा पार्टी के विधायक प्रतिभा शुक्ला और निलिमिया संखवार और अन्य नेताओं ने बाद में आश्रम में उनका सम्मान किया।

अब उनके हजारों शिष्यों ने बड़े समारोहों में प्रतिबंध को धता बताते हुए गंगा तट पर इकठ्ठा हुए, जहाँ संत का अंतिम संस्कार किया गया था। पुलिस मूकदर्शक बनी रही क्योंकि शिष्यों ने द्रष्टा के नश्वर अवशेषों की एक झलक पाने के लिए एक-दूसरे के साथ मजाक किया। वरिष्ठ अधिकारियों ने बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में अपनी बेबसी जाहिर की।

कानपुर के बिठूर में स्थित बंदी माता घाट पर बुधवार दोपहर बाबा शोभन सरकार के पार्थिव शरीर को गंगा में प्रवाहित किया गया। इस दौरान वहां पर बाबा के हजारों भक्त मौजूद रहे। हालांकि इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया।

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