सूरत: तहफ्फुज ए नामूस के रिसालत बोर्ड की गुजरात कमेटी के गठन के लिए रज़ा एकेडमी प्रमुख अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी का 7 दिवसीय दौरा बुधवार को सूरत में पूरा हो गया।

इस मौके पर मरजान शामी मस्जिद में सर्वसम्मति से सूरत कमेटी की कार्यकारिणी का गठन किया गया। अध्यक्ष पद पर मौलाना सय्यद मुहम्मद महिउद्दीन (इमाम व खतीब हजरत ख्वाजा दाना मस्जिद), उपाध्यक्ष मुफ़्ती सलीम मिस्बाही (खतीब व इमाम मोर्चा मस्जिद) और मुफ़्ती सय्यद मुहम्मद तहूर को निर्वाचित किया गया। इसके अलावा सेक्रेटरी पद की जिम्मेदारी मुफ़्ती नूर अहमद अजहरी (खतीब व इमाम मरजान शामी मस्जिद) और जॉइंट सेक्रेटरी की जिम्मेदारी आदिल नूरानी को सौंपी गई। सरपरस्त हजरत मौलाना खेरउलहसन साहब (खतीब व इमाम हुसैनी मस्जिद) को नियुक्त किया गया।

सभी निर्वाचित सदस्यों को बधाई देते हुए अल्हाज नूरी साहब ने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात का दौरा करने पर अहसास हुआ कि तहफ्फुज ए नामूस ए रिसालत बोर्ड का गठन भारत के मुसलमानों की आवाज है।

उन्होंने कहा कि गुस्ताखों के खिलाफ सभी सख्त कार्रवाई चाहते है। लेकिन एक प्लेटफार्म न होने पर बड़े स्तर पर कार्रवाई का होना संभव नहीं हो पा रहा था। तहफ्फुज ए नामूस ए रिसालत बोर्ड के गठन से मुसलमानों की गुस्ताखों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लीगल प्लेटफार्म मिल गया है। जिसमे देश भर में उलेमाओ, वकीलों, आईटी एक्सपर्ट, सामाजिक कार्यकर्ताओं, रिटायर्ड अधिकारियों, विभिन्न सुन्नी मुस्लिमों की तंजीमों की एक बड़ी टीम है। जो देश के कानून के तहत गुस्ताखों को कड़ी सजा दिलाने में अहम भूमिका अदा करेगी।

उन्होंने बोर्ड के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आगामी बैठक में रज़ा एकेडमी मानवाधिकार से जुड़ी विंग के गठन पर भी विचार करेगी। जो देश भर में बेगुनाह मुस्लिमों पर अत्याचार और ज़्यादतियों के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद कर पीड़ितों को न्याय दिलाएगी।