अजमेर: लखनऊ एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के पिता द्वारा उसका शव लेने से मना करने की अजमेर सिथत सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दी चिश्ति के दरगाह दीवान ने सराहना की है उनका कहना है कि सैफुल्लाह ने जो किया वो अफसोसजनक हैं और उसके पिता ने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की वो राष्ट्र के प्रति सर्मपण और राष्ट्रीय भावना है।

देश मे हो रही आतंकी वारदातों पर ब्यान जारी करते हुऐ अजमेर सिथत सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ति दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि मुसलमान युवाओं में क्षमता की कमी नहीं वह अपनी क्षमता अपने कौशल अपनी शिक्षा अपनी देशभक्ति हथेली पर लिए खड़ा है और कहता है कि मुझसे काम लो लेकिन जब कोई उसका हाथ थामने वाला नहीं होता तो आईएस जैसे आतंकी संगठन मुस्लिम युवाओं को बहका कर गलत रास्ते की और धकेल रहा है। लखनऊ की वारदात इसी का एक हिस्सा है।

उन्होने कहा कि आतंकी सैफुल्ला के पिता सरताज की जितनी सराहना की जाऐ कम है कि उन्होने ऐसा कदम उठाया और कहा है कि जो देश का न हुआ वो मेरा कैसा हो सकता है उसने कोई सही काम तो किया नहीं है मुझे उसका मरा हुआ मुंह तक नहीं देखना है ऐसा वक्तव्य ऐसा इंसा ही दे सकता हे जिसमे देश भक्ति कूट कूट कर भरी हो।

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उन्हाने आगे कहा  देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सरताज से दो कदम आगे बढ़ते हुऐ संसद में बयान दिया कि एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के पिता मोहम्मद सरताज को देश का गौरव बताया। उनके प्रति पूरे सदन को सहानुभूति होनी चाहिए वह भी स्वागत करने लायक ब्यान है इससे देष के मुस्लिम युवाओं में विष्वास की भावना और पककी होगी ओर हर देश भकत पिता का विश्वास देश के प्रति ओर मजबूत होगा।

अंत में दरगाह दीवान साहब ने किहा की आज आतंक का समर्थन करने वाले देशो को ओर वहा के रहने वालो को हमारे देश से ओर हमारे देश में रह रहे मोहम्मद सरताज जेसे देश प्रेमी पिताओ से सिख लेने होगी ख़ास तोर से हमारे देश के कश्मीर के माता पिता को भी एसी ही मिसाल क़ायम करनी चIहिए ताकि इस देश के नोजवानो कि सोच बदले।

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