उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने कहा कि लखनऊ मुठभेड़ में मारे गए सैफुल्लाह और गिरफ्तार अन्य संदिग्धों के आतंकी संगठन आईएसआईएस से लिंक के सबूत अभी तक नहीं मिले हैं.

दलजीत चौधरी ने बताया कि ये सभी संदिग्ध खुद से रैडिकलाइज हुए थे और इन्हें बाहर से किसी भी तरह की मदद नहीं मिली थी, इन लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए आईएस के लिटरेचर को पढ़ते थे और उससे प्रेरित होते थे. उन्होंने कहा,  ये इंटरनेट, सोशल मीडिया और वेबसाइट के जरिए आईएस से प्रभावित हुए थे और ‘खुरासान ग्रुप’ बनाकर खुद अपनी पहचान बनाना चाहते थे.

इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस दावे पर जिसमे उन्होंने कहा था कि बम ब्लास्ट की तस्वीरें आतंकियों ने सीरिया भेजी थी. ससे संबंधित सवाल पर दलजीत चौधरी ने कहा, ‘हो सकता है कि मध्य प्रदेश पुलिस के पास ऐसी कोई जानकारी हो, लेकिन हमें ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला है.

एडीजी ने बताया कि हमने सैफुल्ला के भाई और पड़ोस में रहने वाले हाजी साहब के जरिए कोशिश की ताकि सैफुल्ला खुद को सरेंडर कर दे लेकिन उसने सरेंडर करने से इनकार कर दिया है. हमने काफी कोशिश की कि सैफुल्ला खुद को सरेंडर करे लेकिन बावजूद इसके हमने अपनी कोशिशे जारी रखी, आखिरकार हमें फोर्सफुल एंट्री कमरे में करनी पड़ी जिसके बाद सैफुल्ला की मौत हो गई.

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