शिवराज शासन में व्यापम की तरह ही एक और घोटाला सामने आया हैं जो शिक्षण संस्थानों से ही जुड़ा हैं. ये मामला प्रदेश के करीब आठ लाख छात्रों को बांटी गई छात्रवृति का हैं. जिसमे 900 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया हैं. इस मामलें में लोकायुक्त ने मामला दर्ज कर लिया हैं.

दरअसल, 2 साल पहले आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में बड़ा घोटाला सामने आया था. इसमें कॉलेज संचालकों ने छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति तो ले ली पर वे परीक्षा में बैठे ही नहीं. मामला खुलने पर लोकायुक्त पुलिस ने प्रकरण दर्ज करा जांच की तो खुलासा हुआ कि एक ही छात्र के दस्तावेज पर कई छात्रवृत्तियां निकाली गईं.

जांच में पता चला कि कई मामलों में तो छात्रों को पता ही नहीं चला कि उनके नाम पर छात्रवृत्ति भी आई थी. इसे देखते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने पिछले दो साल में दी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की पड़ताल करने का फैसला किया है.

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विभाग के सचिव रमेश थेटे ने बताया कि सभी तरह की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की जानकारी बुलाई है. सत्यापन भी कराएंगे. यदि जानकारी गलत दी गई तो वैधानिक कार्रवाई करेंगे.

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