bhagwat_30_03_2016

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर से धर्मांतरण के मुद्दे को हवा देते हुए इस बार मिशनरियों को निशाने पर लिया हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका- यूरोप में ईसाई धर्म फैलाने के बाद अब उनकी नजरे एशिया विशेषकर भारत पर हैं. हालांकि देश में ऐसी कोशिशें कामयाब होने की संभावना नहीं है.

शनिवार को नवसारी के वंसदा में उन्होंने कहा, अमेरिका, यूरोप में लोगों को ईसाई धर्म में लाने के बाद वे (मिशनरी) एशिया पर नजर गड़ाए हुए हैं. लेकिन ईसाई मिशनरी हिंदुओं का धर्मांतरण करने में कभी कामयाबी नहीं मिलेगी क्योंकि मिशनरियों में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि वह हिन्दूओं का धर्म परिवर्तन कर सके. उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि जाति और भाषा की परवाह किए बिना सब मिलकर साथ रहें.

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भगवत ने आगे कहा, चीन खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता है, लेकिन क्या वह खुद को ईसाई धर्म के तहत आने की अनुमति देगा? नही देगा इसलिए अब मिशनरियों लगता है कि भारत वह स्थान है. लेकिन उन्हें ध्यान में रखना चाहिए कि 300 वर्षों में भारत की आबादी का केवल छह प्रतिशत ही ईसाई धर्म में परिवर्तित किया जा सका है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योकि मिशनरियों में हिम्मत नहीं है. उन्होंने दक्षिण गुजरात के वांसदा में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन के दौरान कही गया है.

उन्होंने कहा हिंदू समुदाय मुश्किल में है. हम किस देश में रह रहे हैं? अपने ही देश में? यह हमारी भूमि है, (उत्तर में) हिमालय से लेकर (दक्षिण में) सागर तक. यह हमारे पूर्वजों की भूमि है। भारत माता हम सब की मां है.

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