केरल हाई कोर्ट जज ने कहा – ब्राह्मण कभी सांप्रदायिक नहीं होता, विचारशील और अहिंसावाद…

11:58 am Published by:-Hindi News

केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस वी चितंबरेश ने ब्राह्मण समुदाय की तारीफ करते हुए कहा कि ब्राह्मण कभी सांप्रदायिक नहीं होता। वह लोगों से प्यार करता है, विचारशील और अहिंसावादी होता है।

जज ने कहा, ‘ब्राह्मण कौन है? पूर्व जन्मों के सुकर्मों की वजह से ब्राह्मण का जन्म दो बार होता है। उसे कुछ खास और अलग विशेषताएं, स्वच्छ आदतें, मजबूत सोच,  खरा चरित्र मिला है। वह अधिकतर शाकाहारी जीवन जीता है और उसे दक्षिण भारतीय संगीत के प्रति प्रेम होता है। एक ब्राह्मण में ये सारी अच्छे गुण मिलते हैं…यह ध्यान देने लायक बात है कि ब्राह्मण कभी सांप्रदायिक नहीं होता। वह लोगों से प्यार करता है, विचारशील और अहिंसावादी होता है। वही है जो किसी भी अच्छे काम के लिए दान देता है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘जैसा कि करीमपुझा रमन (केरल ब्राह्मण सभा अध्यक्ष) ने कहा, यह आपको विचार करना है कि क्या आरक्षण सिर्फ जाति या समुदाय पर आधारित होना चाहिए? एक संवैधानिक पद पर आसीन होने की वजह से यह मेरे लिए सही नहीं कि मैं अपनी राय रखूं। मैं यहां कोई अपनी राय नहीं रख रहा। मैं बस आपका ध्यान खींच रहा हूं या आपको याद दिला रहा हूं कि आवाज उठाने या आंदोलन के लिए आपके पास इकलौता मंच आर्थिक आरक्षण है, जाति या समुदाय के आधार पर नहीं। हां जरूर…आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लिए 10 प्रतिशत रिजर्वेशन है।’

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जस्टिस वी चिताम्बरेश कहते हैं कि ब्राह्मण समाज अपनी मांग और जरूरतों को लेकर मुखर नहीं है. वो कहते हैं, ” जैसा कि अभी महोदय रमन ने कहा, जो बच्चा रोता है उसी को दूध मिल पाता है। अब वक्त आ गया है कि हम सामूहिक आवाज उठाएं, एकल गीत ना गाएं, वेदों की पाठशाला जो कम हो रही है उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने की जरूरत है।”

जस्टिस ने कोच्चि में 19 जुलाई को आयोजित तमिल ब्राह्मण ग्लोबल मीटिंग में संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। दरअसल, जस्टिस चितंबरेश 2011 में केरल हाई कोर्ट में अडिशनल जज बने। बाद में दिसंबर 2012 में वह स्थाई जज बन गए।

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