ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख, असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को 2007 मक्का मस्जिद विस्फोट मामले के आरोपी असीमानंद की जमानत को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर आतंक के मामलों में दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.

केंद्र सरकार से स्वामी असीमानंद की जमानत रद्द करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि “आतंकवाद से निपटने के मामले में भाजपा सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है.”  उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवाद से मुकाबले करने के मामले में सरकार गैर मुस्लिमों के प्रति नरम, जबकि मुसलमानों के प्रति उसका रवैया कड़ा है.

उन्होंने कहा कि भाजपा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बातें करती थी और कहती थी कि वह आतंकवाद की समस्या को धार्मिक नजरिए से नहीं देखती. ओवैसी ने कहा, असीमानंद के लिए इतना प्यार क्यों? उनकी जमानत रद्द की जाए। आप एक तरफ नरम तो दूसरी तरफ सख्त रुख अख्तियार नहीं कर सकते.

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ओवैसी ने कहा कि असीमानंद ने अजमेर विस्फोट मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी, लेकिन उसके बाद भी उसे अदालत ने रिहा कर दिया. भाजपा सरकार ने अदालत के फैसले के खिलाफ अपील भी नहीं की. उन्होंने कहा कि असीमानंद के अच्छे दिन आ गए हैं और अब अच्छे दिन साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के लिए भी आएंगे.

एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, जब आतंकवाद का सामना कर रहे गैर मुस्लिमों को जमानत मिलती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है, लेकिन समान आरोपों पर मुस्लिमों को जेल में 10 साल काटने पड़ते हैं, क्योंकि उन्हें जमानत नहीं मिलती. यह बहुत बड़ा अन्याय है.

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