भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन अब हैदराबाद क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे. उनके नामांकन को रद्द कर दिया गया है.

नामांकन रद्द होने पर अजहरुद्दीन ने निराशा जताते हुए कहा कि मैं इस कदम से निराश हूं. कोर्ट ने मुझे सभी आरोपों से बरी कर दिया है इसके बाद भी मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया है. इस फ़ैसले पर अज़हर अब कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं.

अज़रुद्दीन ने यह आरोप भी लगाया कि हैदराबाद क्रिकेट संघ में में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार बेहद ज़्यादा है. उनके मुताबिक अंडर 14 क्रिकेट में हर मैच में 6 नए खिलाड़ी शामिल कर लिए जाते हैं. उन्होंने कहा, “ये पूरी प्रक्रिया ही मुझे धोखाधड़ी से भरी हुई लगती है. उन्होंने चुनाव में लगातार देरी की. उन्होंने मुझसे जो भी सवाल पूछे मैंने उसका जवाब दिया. उन्होंने BCCI के बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कोर्ट का ऑर्डर दिखाया. इन सबके बावज़ूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया. जिससे मैं बहुत दुखी हूं.’

गौरतलब है कि अजहरुद्दीन ने मंगलवार (10 जनवरी) को हैदराबाद क्रिकेट संघ (एचसीए) के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दायर किया था. अजहरुद्दीन ने नामांकन भरने के बाद कहा था, ‘हैदराबाद के साथ समस्या यह है कि क्रिकेट पर ध्यान नहीं है. रणजी ट्रॉफी में हम नीचे से दूसरे स्थान पर रहे. मेरी इच्छा है कि हैदराबाद में एक बार फिर क्रिकेट फले फूले. मैं क्रिकेट के लिए सचमुच अच्छा करना चाहता हूं’.

अज़हरुद्दीन ने 99 टेस्ट मैच खेले और 22 शतक के साथ 6 हज़ार से ज्यादा रन और 334 वनडे में 7 शतकों के साथ 9 हज़ार से ज्यादा रन बनाए थे, लेकिन साल 2000 में मैच फ़िक्सिंग की वजह से BCCI ने उन्हें लाइफ़ बैन की सज़ा सुना दी थी. हालांकि 8 नवंबर 2012 को आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले से पाक-साफ़ बरी किया.


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