राजस्थान के अलवर जिले में भगवा आतंकियों द्वारा गौरक्षा के नाम पर ली गई मुस्लिम युवक पहलू खान की हत्या पूर्व-नियोजित थी. ये कहना हैं स्थानीय मेव समुदाय का. इस हत्याकाण्ड के पीछे अल्पसंख्यक समुदाय में डर पैदा करना था.

दरअसल, ये इलाका मेवात से जुड़ा हुआ हैं. जिसके कारण यहाँ पर ज्यादातर मुस्लिम आबादी मेव समुदाय की. जिनका पेशा पशुपालन और खेती ही हैं. इस बारें में अलवर मेव समुदाय के सिफ़त मैनेजर कहते हैं, दरअसल मुदाय को भयभीत और हतोत्साहित करने का योजनाबद्ध प्रयास था. वे कहते हैं, आप सोच सकते हैं इस घटना से हमारे बच्चों में तरक्की के अरमानों को कितना धक्का लगा होगा.

वो बताते हैं कि आप जिले की जनगणना के आंकड़े देख लीजिए. इस क्षेत्र में मेव समुदाय के पास दस हजार गाएँ हैं. वे खेती और पशुपालन करते हैं. यह घटना एक एजेंडे का हिस्सा है. सिफ़त मैनेजर का कहना हैं, 1990 -92 में देश के कई भागों में घटनाएँ हुई लेकिन इस क्षेत्र में शांति रही.

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सामाजिक कार्यकर्त्ता वीरेंद्र विद्रोही कहते हैं, यह अल्पसंख्यक और वंचित वर्गो में डर पैदा करने की नियत से किया गया काम है. ये उन लोगों का काम है जो धर्म का नाम लेकर सियासत करते हैं. वहीँ मेवात क्षेत्र में लम्बे समय से शिक्षा का अभियान चला रहे नूर मोहम्मद कहते हैं, इस घटना से लोग बहुत डरे हुए हैं. मगर राहत की बात है कि बहुसंख्यक समाज के लोग मेव समुदाय के साथ खड़े हैं.

नूर मोहम्मद बताते हैं कि इस बार भी मेव समाज के पांच लोगों ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा का मुख्य इम्तिहान पास किया है. लड़कियां आई आई टी तक पहुंची हैं और पढ़ रही हैं. लेकिन इस घटना ने सबको हिला कर रख दिया है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अलवर जिले में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 14 प्रतिशत से ज्यादा है. अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में 789 गावों में मेव बिरादरी के लोगों की अच्छी संख्या है. (बीबीसी इनपुट के साथ)

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