Sunday, June 20, 2021

 

 

 

स्पेशल मैरिज एक्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया बड़ा बदलाव, प्रेमी जोड़ो को मिली राहत

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उत्तर प्रदेश में स्पेशल मैरिज एक्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा बदलाव करते हुए प्रेमी जोड़ों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने कानून के तहत अपनी मर्जी से शादी करने वाले जोड़े के लिए एक महीने पहले शादी का नोटिस पब्लिश कराने के नियम की अनिवार्य को समाप्त कर दिया है।

धर्मांतरण से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, “इस तरह के नोटिस पब्लिश करने को अनिवार्य बनाना मौलिक और निजता के अधिकारों का हनन होगा। जिनके तहत किसी भी शख्स को राज्य और अन्य कारकों के हस्तक्षेप के बिना शादी के लिए पार्टनर चुनने की आजादी भी शामिल है। 1954 के अधिनियम की धारा 5 के तहत नोटिस देते हुए शादी करने वाले जोड़े के लिए ये वैकल्पिक होगा कि वो मैरिज ऑफिसर को लिखित तौर पर बताएं कि धारा 6 के तहत वो नोटिस पब्लिश करवाना चाहते हैं या फिर नहीं।”

कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर शादी करने वाला जोड़ा नोटिस पब्लिश करने के लिए नहीं करता तो अधिकारी ऐसी कोई सूचना पब्लिश नहीं करेगा। साथ ही इस पर आपत्ति भी दर्ज किया जा सकता है। अधिकारी के पास इसके अलावा बाकि सभी अधिकार होंगे जो नियम है उसे पालन करना होगा। इन नियमों के तहत दोनों पक्षों की पहचान करना, उम्र का पता लगाना, साथ ही दोनों की सहमति की पुष्टि करना सहित कई अहम नियम शामिल हैं।

बता दें कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा-5 के तहत अगर कोई दो धर्म के लोग शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं तो पहले उन्हें मैरिज ऑफिसर को नोटिस देना होगा। जिसके बाद अधिकारी इसे धारा-5 के तहत अपनी फाइन में लगाने के अलावा सार्वजनिक कर देगा। जहां इसे कोई भी देख सकता है। इस नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद इस विवाह को लेकर कोई भी अपना विरोध दर्ज करवा सकता है। या फिर बता सकता है कि इसमें किन नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है।

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