बरेली – अभी मौलाना तौक़ीर अहमद रज़ा खान को देवबंद का दौरा किये दो दिन भी नही गुज़रे है वही इस मामले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. आला हजरत दरगाह के प्रमुख मौलाना सुहान रज़ा खान ने यहाँ तक कह दिया की अगर तौकीर रज़ा अपनी इस हरकत पर ऐलानिया तौबा नही करते और भविष्य में इस तरह के गैर शरई काम करने जारी रखते है तो खानदान-ए-आला हजरत और अहले सुन्नत से जुड़े लोग उनका बायकाट करे.

गौरतलब है की आला हजरत के पड़पोते मौलाना तौकीर रज़ा खान ने दिल्ली से आते समय देवबंद का दौरा किया था जहाँ उन्होंने कहा की अब वक़्त आ गया है जब देवबंदी और बरेलवी फिरके को एक हो जाना चाहिए.

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वहीँ दूसरी तरफ मौलाना सुबहानि मियां ने कहा कि अहले सुन्नत वल जमात दारुल उलूम देव्बंद और इसके अकीदे के खिलाफ आला हजरत के ज़माने में ही फतवे लगा चुका है! पैगम्बरे इस्लाम की शान में ना काबिले कुबूल गुस्ताखियों की एक फेहरिस्त है और देवबंद का इन अकीदों को न छोड़ना और तौबा न करना अहम् है!

हम अपने ताल्लुकात किसी से भी कुरान और सुन्नत की रौशनी में रखते हैं और पैगम्बरे इस्लाम और सहाबा ए किराम औलिया ए किराम की शान में गुस्ताखी और सुन्नी मुसलमानों पर कुफ्र और शिर्क की झूठे फ़तवे वहाबी देवबंदी मदारिस की तरफ से इनकी किताबो से आज भी जारी हैं! उन्होंने कहा इसलिए किसी भी तौर पर इस वर्ग से ताल्लुकात नहीं हो सकता है जब तक यह सुन्नी जमात के अकीदे को न माने!

दरगाह आला हज़रत ने हिंदुस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में इसी सुन्नी अकीदे की हिफाज़त की जिसमे अज़मते रिसालत, अज्मते सहाबा और मुहब्बते औलिया पर मुश्तमिल तालीम हैं ! जिसको सलफ सालेहीन ने माना और अपनाया! हज़रत खवाजा ग़रीब नवाज़ और हजरत निजामुद्दीन औलिया की तालीम का नाम ही अहले सुन्नत वल जमात है यही बरेली का रास्ता है !

इसलिए तौकीर रज़ा खान द्वारा गुमराह जमात की हिमायत करने और गुस्ताख उलेमा से ताल्लुकात बढ़ाने पर अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा के लिए बायकाट ज़रूरी है! क्यूंकि जो अल्लाह का और उसके रसूल को कमतर जाने वोह मुसलमान ही नहीं और देवबंद के उलेमा अल्लाह के रसूल के गुस्ताख हैं!

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