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लखनऊ के पासपोर्ट ऑफिस में हुए पासपोर्ट विवाद ने अब नया मौड़ ले लिया है। मामले की जांच कर रही लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) की जांच के बाद अब तन्वी और अनस का पासपोर्ट रद्द हो सकता है।

दरअसल, इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस के मुताबिक, उन्हें तन्वी के लखनऊ में रहने से जुड़ा कोई दस्तावेज़ नहीं मिला है। मंगलवार को लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा, ‘हमारी जांच में सामने आया है कि तन्वी सेठ अपने बताए गए पते पर पिछले एक साल से नहीं रह रही थीं। हमने अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफिस को भेज दी है। आगे की जांच उन्हीं के द्वारा की जाएगी।’

जांच में सामने आया कि तन्वी और उनके पति दोनों लखनऊ में नहीं बल्कि नोएडा में नौकरी करते हैं और वहीं रहते हैं। तन्वी की सीडीआर निकलवाई गई तो पता चला कि 14 जून से पहले उनकी लोकेशन नोएडा में ही थी। वह 14 जून को ही लखनऊ आई थीं और यहां 19 जून को उन्होंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था।

दूसरी और झूठी जानकारी देने के मामले में विभाग अनस और तन्वी पर 5000 रुपये जुर्माना भी लगा सकता है। साथ ही विभाग को धोखाधड़ी व गुमराह करने के लिए तन्वी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के तहत एफआईआर भी दर्ज करवा सकता है। पासपोर्ट अधिनियम के मुताबिक, आवेदक जो पता लिख रहा है, उस पर उसे एक साल से अधिक समय तक रहना जरूरी है। तन्वी ने अपने एप्लिकेशन में कैसरबाग स्थित ससुराल का पता दिया है, लेकिन वह एक साल से वहां नहीं रह रही हैं।

गौरतलब है कि पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्रा पर आवेदक तन्वी सेठ ने बदसलूकी का आरोप लगाया था. तन्वी सेठ के मुताबिक, जब वह अपना आवेदन लेकर विकास मिश्रा के पास गईं तो उन्होंने मुस्लिम से शादी करने को लेकर निजी कमेंट किए थे। तन्वी सेठ ने इस पूरे मामले की शिकायत ट्विटर के जरिये विदेश मंत्रालय से की थी। जिसके बाद विकास मिश्रा का तबादला गोरखपुर करने के साथ आनन-फानन में तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी का पासपोर्ट जारी कर दिया गया था।

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