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मुगलसराय का नाम बदलने के बाद अब उत्तरप्रदेश की योगी सरकार सुलतानपुर का नया नाम बदलने की तैयारी कर रही है। लंभुआ से भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी ने शुक्रवार को सुलतानपुर का नया नाम कुशभवनपुर करने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया है।

देवमणि द्विवेदी ने बताया कि सुल्तानपुर का नाम अलाउद्दीन खिलजी के समय में जबरन रखा गया था। लोगों को यह नाम बिल्कुल पसंद नहीं था। देवमणि द्विवेदी ने सुल्तानपुर की कहानी सुनाते हुए बताया कि एक बार अरब के दो घोड़ा व्यापारियों को कुशभवनपुर के कबीले के सरदारों ने मार दिया था। इससे गुस्साए अलाउद्दीन खिलजी ने इस शहर से अपमान का बदला लेने के बारे में सोचा और इस जगह का नाम सुल्तानपुर रख दिया। उन्होने कहा, सदन ने इस पर चर्चा के लिए मंजूरी भी दे दी है।

इसी बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बहराइच का नाम बदलकर महाराजा सुहेलदेव के नाम पर करने की मांग की है। इसके अलावा क्षेत्र के भाजपा विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने मोहम्मदी तहसील का नाम बदलने की मांग की है। इतना ही नहीं फैजाबाद, इलाहाबाद, अकबरपुर, सिकन्दरा और रसूलाबाद के भी नाम बदलने की भी मांग उठ रही है।

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वहीं यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह इलाहाबाद का नाम ‘प्रयाग राज’ किये जाने को लेकर राज्यपाल राम नाईक को पत्र लिख चुके हैं, वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य फैजाबाद का नाम बदलकर ‘अयोध्या धाम’ करने की बात कह चुके हैं। पिछले दिनों योगी सरकार ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन कर दिया है।

कानपुर देहात के मुजफ्फरनगर निवासी समाजसेवी ऋषिपाल सिंह ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर जिले के सिकन्दरा, रसूलाबाद, अकबरपुर और रनियां का नाम बदलने की अर्जी लगाई है। उनकी मांग पर राजस्व परिषद ने इन कस्बों के नाम परिवर्तन पर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है। साथ ही एसडीएम से नाम बदलने को लेकर प्रस्ताव भी मांगे हैं।

ध्यान देने योग्य बात ये है कि ये सभी नाम मुस्लिम शासकों के शासन से जुड़े है। इनमे से अधिक़तर को मुस्लिम शासकों ने ही बसाया था।

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